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सूर्यकुंड मंदिर से जुड़ी है देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था

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historical place - फोटो : Kaithal
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। माता गेट स्थित शहर के ऐतिहासिक सूर्यकुंड मंदिर से देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी है। इस मंदिर में पूजा पाठ करने के लिए हरियाणा प्रदेश के साथ-साथ देशभर व विदेशों से भी श्रद्धालु आते हैं। विशेष त्योहारों पर यहां मेले का भी आयोजन होता है। मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। यह कुरुक्षेत्र की 48 कोस की परिधि में आता है। प्राचीन मान्यता के अनुसार महाभारत काल में ज्येष्ठ पांडव पुत्र युुधिष्ठिर ने कैथल में नवग्रह कुंडों की स्थापना की थी। इनमें से सबसे बड़ा कुंड माता गेट पर सूर्यकुंड के नाम से स्थापित किया गया था। वे यहां कुंड में स्नान करने के बाद देवी-देवताओं का पूजन करते थे। तभी से श्रद्धालु यहां पर पूजा-पाठ करते आ रहे हैं।
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ये हैं नवग्रह कुंड : मंदिर के महंत राजेश्वर पुरी ने बताया कि महाभारत के युद्ध के समय जो रक्तपात हुआ था, उससे भूमि की शुद्धि के लिए कैथल में नवग्रह कुंडों की स्थापना की गई थी। इनमें सूर्य कुंड कैथल के केंद्र में माता गेट पर बनाया गया था। इसके अलावा शहर में अलग-अलग जगहों पर शनि कुंड, शुक्र कुंड, गुरु कुंड, बुध कुंड, मंगल, राहु , केतु व चंद्र कुंड प्रमुख हैं। जानकारी के अनुसार सूर्य, शनि, बृहस्पति व बुध कुंड तो अपनी जगहों पर आज भी मौजूद हैं। जबकि अन्य का अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका है। बहुत कम लोग ही इनके बारे में जानते हैं। इनकी विशेषता यह है कि ब्रह्मांड में जिस अक्षांस और कोण पर नवग्रह हैं, कैथल में भी उन्हीं स्थानों पर ये कुंड स्थापित किए गए हैं।
सूर्यकुंड के साथ बने हैं ये मंदिर: महंत ने बताया कि सूर्यकुंड के साथ यहां पर माता शीतला और माता काली का मंदिर है। भगवान शिव का मंदिर भी यहां है। पूरे मंदिर की दीवारों पर काले-भूरे रंग के ग्रेनाइट पत्थर को जड़ा गया है। मंदिर के बाहरी चारदीवारी में भगवान दत्तात्रेय, भगवान लक्ष्मीनारायण, राधाकृष्ण, हिंगलाज माता, मां दुर्गा, माता बग्लामुखी, मां अन्नपूर्णा व गेट पर हनुमान जी की मूर्तियां स्थापित की गई हैं।
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चैत्र माह के नवरात्रों में लगा मेला: चैत्र माह के नवरात्रों में यहां पर विशाल मेला लगता है, जहां देश के साथ-साथ विदेशों से भी श्रद्धालु स्नान व पूजा पाठ करने के लिए आते हैं। उसके बाद वर्ष का नया कार्य शुरू कर सकते हैं। इसी मंदिर में मां गंगा, संतोषी माता, बसंती माता व मैदानण माता की पूजा होती है। महंत राजेश्वर पुरी ने बताया कि शीतला माता हरियाणा के लोगों की कुलदेवी मानी जाती हैं। ज्येष्ठ और आषाढ़ माह में हर बुधवार और वीरवार को कुंड में नहाकर माता की पूजा की जाती है। यहां फूलमदेह बड़ी माता के मंदिर में 36 बिरादरी द्वारा और मां काली मंदिर में वर्ष में एक निर्धारित समय पर बाजीगर समुदाय की ओर से पूजा पाठ के लिए मेला लगाया जाता है।
मंदिर प्रांगण में बनाया गया है सुंदर उपवन : मंदिर में प्रांगण में एक तरफ सुंदर उपवन बनाया गया है, जिसमें शाम के समय शहर भर से श्रद्धालु घूमने के लिए आते हैं। इसके अलावा महाभारत काल को प्रदर्शित करती एक गुफा भी है। उपवन में कई तरह के फलों, फूलों और औषधियों के पौधे लगाए गए हैं। शहर की सामाजिक संस्थाओं की ओर से समय-समय पर यहां धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और भंडारे लगाए जाते हैं।
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