भारत आयुष्मान योजना को आगामी 23 सितंबर को एक साल पूरा हो जाएगा। लेकिन अभी तक योजना की पहुंच जिले में सभी पात्र लोगों तक नहीं पहुंच पाई है। योजना के तहत वर्ष 2011 के आर्थिक सामाजिक जनगणना के तहत पाए गए करीब 3.25 हजार लोगों के कार्ड बनाए जाने हैं। जिसमें से एक साल में महज 1.95 लाख लोगों के ही कार्ड बन सके हैं। योजना में कई सामान्य बीमारियों के लिए रेट कम होने के कारण और मानक काफी ऊंचे होने से प्राइवेट अस्पताल इस काम में कम रुचि ले रहे हैं। यही कारण है कि पूरे साल में केवल पांच प्राइवेट अस्पतालों द्वारा योजना के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया गया है। हालांकि बड़े ऑपरेशनों में लोगों को काफी लाभ हुआ है। एक साल में लगभग 2 करोड़ रुपये की राशि सरकार द्वारा मरीजों के इलाज पर खर्च की जा चुकी है, जिसके लिए प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों में भुगतान किया गया है।
ये है आयुष्मान योजना
भारत आयुष्मान योजना के तहत आर्थिक सामाजिक जनगणना 2011 के तहत जिले में एक निर्धारित आय वाले परिवारों को पात्र माना गया है, जिनके बीमारी के समय जरूरत अनुसार कार्ड बनाए जा रहे हैं। इसमें विशेष पैकेज के तहत मरीज को अपना गोल्डन कार्ड लेकर संबंधित अस्पताल में जाना है। वहां जाकर यदि वह योजना के तहत पात्र है और उस अस्पताल में संबंधित बीमारी का इलाज है तो उसे कोई भी भुगतान नहीं करना। उसका भुगतान सरकार द्वारा किया जाएगा। लेकिन उसका पूरा इलाज हो जाएगा।
प्राइवेट अस्पताल कम ले रहे रुचि
चिकित्सकों का कहना है कि योजना के तहत इलाज के लिए पैकेज तो काफी ठीक हैं। लेकिन मानक काफी ज्यादा हाई हैं। इसके कारण जिले में महज 5 प्राइवेट अस्पताल पैनल पर हैं। प्राइवेट अस्पतालों में शाह अस्पताल, सिग्नस, गणपति, जयपुर व जयप्रकाश अस्पताल ही पैनल पर आए हैं।
सामान्य बीमारियों में आ रही है मरीजों को परेशानी
कैथल निवासी राजेश कुमार ने बताया कि सामान्य बीमारियों में बुखार, खांसी सहित अन्य छोटी-मोटी बीमारियों के इलाज के लिए जब प्राइवेट अस्पताल में कार्ड दिखाते हैं तो वहां कार्ड नहीं चलता। वहां कहा जाता है कि सरकारी अस्पताल में इलाज करवा लिजिए। जांच-पड़ताल करने पर पता चला कि सामान्य बीमारियों में पैकेज काफी कम हैं। सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए ज्यादा समय लगता है। इसके अलावा जिले में अभी तक दंत चिकित्सा, प्लास्टिक सर्जरी जैसी सुविधाएं योजना के तहत अभी नहीं मिल रही हैं।
प्रचार के लिए नहीं मिला अलग से बजट, 2.75 लाख पंफलेट जरूर बांटे गए
योजना के तहत जिले में 2.75 लाख पंपलेट जरूर बांटे गए है, लेकिन प्रचार-प्रसार के लिए अलग से कोई बजट अलॉट नहीं किया गया। केवल पैनल पर आए अस्पतालों पर सरकारी अस्पतालों में जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा अपने खर्च पर बैनर जरूर लगाए गए हैं। इसके अलावा 14555 नंबर जारी किया गया है। जिस पर कॉल करके योजना के संबंध में जानकारी हासिल की जा सकती है।
2000 मरीजों को मिला है योजना का लाभ
सीएमओ डा. सुरेंद्र नैन ने कहा कि योजना के तहत पहले साल करीब 2000 मरीजों को इस योजना का लाभ मिला है, जिसमें हार्ट अटैक, ब्रेन हेमरेज सहित कई बड़ी बीमारियों का निशुल्क इलाज किया गया है। साथ ही प्राइवेट अस्पतालों, सरकारी अस्पताल में बड़ी बीामरियों के ऑपरेशन हों या फिर कोई अन्य तरीके से इलाज, लोगों को इसका लाभ दिया जा रहा है। अभी तक 79,191 परिवारों के 1 लाख 95 हजार लोगों के कार्ड बनाए जा चुके हैं। लगभग 1 करोड़ 95 लाख रुपये की राशि का योजना के तहत इलाज के लिए भुगतान किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में 58,421 व शहरी क्षेत्र में 20,700 परिवारों के कार्ड बन चुके हैं। हर्निया, अपेंडिक्स, बिना दूरबीन की सर्जनी व अन्य कई तरह के इलाज किए जा रहे हैं। सभी पीएचसी, जिला अस्पताल व पैनल पर आए निजी अस्पतालों में इस योजना के तहत कार्ड बनाए जा रहे हैं।
कई लोगों को मिला है जीवनदान
योजना के तहत ऑपरेशन के माध्यम से लाभ उठाने वाले अनेकों लोगों को जीवनदान भी मिला है। सिग्नस अस्पताल में अभी हाल ही में एक महिला सुभाष नगर निवासी शकुंतला देवी के दिमाग का ऑपरेशन किया गया। दिमाग में ट्यूमर का ऑपरेशन किया गया। डा. के इलियास पाशा ने यह ऑपरेशन किया। इस मरीज को पीजीआई रोहतक और चंडीगढ़ से ऑपरेशन से इंकार किया जा चुका था। आयुष्मान योजना के तहत उसका ऑपरेशन किया गया। इसके अलावा कई हृदय संबंधी बीमारियों के ऑपरेशन भी निशुल्क किए गए।