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हिंदुत्व ही विश्वबंधुत्व की है आधारशिला : डाॅ.ऋषि राम शर्मा

Mon, 23 Feb 2026 02:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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22केएलटी1: कार्यक्रम में बोलते मुख्य वक्ता डा.प्रीतम सिंह
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कलायत। कलायत की अनाज मंडी में विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत श्री कपिल मुनि मंदिर में हवन यज्ञ के साथ हुई। इसकेे बाद पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ ध्वजा यात्रा एवं कलश यात्रा निकाली गई जिसका समापन अनाज मंडी स्थित कार्यक्रम स्थल पर हुआ। इस दौरान भजन-कीर्तन, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि इस सम्मेलन का उद्देश्य समाज में एकता, संस्कार और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करना है। कनाडा से आए डाॅ.ऋषि राम शर्मा ने कहा कि हिंदुत्व ही विश्वबंधुत्व की आधारशिला है। हिंदू समाज यदि संगठित और सशक्त रहेगा तो वह संपूर्ण विश्व को एकता और मानवता का मार्ग दिखा सकेगा। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज विश्व में जहां-जहां पहुंचा वहां उसने उस देश और समाज के उत्थान में सकारात्मक योगदान दिया है। इस दौरान आयोजकों ने संत महात्माओं व पुजारियों का अंगवस्त्र से सम्मान किया।
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मुख्य वक्ता प्रोफेसर डा.प्रीतम सिंह ने वसुधैव कुटुम्बकम की भावना को हिंदू जीवन दृष्टि का मूल बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया एक परिवार है। विश्व के किसी भी कोने में संकट हो तो हिंदू उसे अपनी समस्या मानता है। भारत ने सदैव पीडि़तों को शरण दी है। चाहे पारसी समाज हो या तिब्बती समुदाय भारत ने सबको अपनाया है। उन्होंने कहा कि हिंदू ही विश्व के कल्याण की कामना करता है। हिंदुस्तान व हिंदू संस्कृति करीब एक हजार साल की इस्लाम व अंग्रेज हुकूमत की गुलाम रही। फिर से हिंदू का राज तो 75 वर्षों से ही चल रहा है। उन्होंने कहा कि हिंदू दर्शन प्रत्येक व्यक्ति के भीतर ईश्वर का दर्शन करता है। नमस्ते का अर्थ है मेरे भीतर का ईश्वर आपके भीतर के ईश्वर को प्रणाम करता है। प्रकृति के प्रत्येक रूप नदी, वृक्ष, पशु-पक्षी की पूजा हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है। आज विश्व पर्यावरण संरक्षण की बात कर रहा है जबकि हिंदू समाज प्राचीन काल से ही प्रकृति पूजन की परंपरा निभाता आया है।
प्रकृति संरक्षण और संवर्धन को जीवन शैली का हिस्सा बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत में आज जाति, धर्म, समुदाय के नाम पर बिखरे हुए हिंदूओं को संगठित होकर एक होने की बेहद आवश्यकता है। जैसे परिवार में हम एक होते हैं उसी प्रकार हिंदुओं को एक होना है। पहले बुजुर्ग बच्चों को परिवार बनाना सिखाते थे अब बच्चे रील बनाना सीख रहे हैं जिसे खत्म करना होगा। उन्होंने युवा शक्ति से आह्वान किया कि एक श्रेष्ठ भारत बनाने के लिए सभी को संगठित होना होगा। कार्यक्रम की समाप्ति पर आयोजन समिति द्वारा प्रसाद का वितरण किया गया। इस मौके पर डाॅ.ऋषिराम, डाॅ.अनिल व डाॅ.कृष्णचंद्र मौजूद रहे।
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22केएलटी1: कार्यक्रम में बोलते मुख्य वक्ता डा.प्रीतम सिंह

22केएलटी2: कार्यक्रम में मौजूद भारी भीड़

22केएलटी3: संतों को अंगवस्त्रों से सम्मानित करते आयोजक मंडल सदस्य

22केएलटी4: भगवा रंग में रंगी महिलाएं

22केएलटी5: सांस्कृतिक प्रस्तुति देते कलाकार

22केएलटी1: कार्यक्रम में बोलते मुख्य वक्ता डा.प्रीतम सिंह

22केएलटी1: कार्यक्रम में बोलते मुख्य वक्ता डा.प्रीतम सिंह

22केएलटी1: कार्यक्रम में बोलते मुख्य वक्ता डा.प्रीतम सिंह

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