देश के आजाद होने के बाद से लेकर अब तक महिलाओं की स्थिति में लगातार सुधार हो रहे हैं। संविधान संसोधन से महिलाओं को निकाय और पंचायत चुनाव लड़ने का अधिकार मिला। आज महिलाएं नौकरशाही से लेकर राजनीति में शीर्ष स्थान पर हैं। महिला सम्मान दिवस पर महिलाओं ने बताया कि सरकार द्वारा महिलाओं को कम दर्जा दिया गया है। आज भी महिला की किसानों में गिनती नहीं होती। बेटियां वर्तमान समय में भी सुरक्षित नहीं हैं। आधुनिक समय में महिलाओं के लिए सकारात्मक सोच की जरूरत है।
आंगनबाड़ी राज्य महासचिव शकुंतला ने कहा कि सरकार वैसे तो कहती है महिलाओं को बराबर का दर्जा दिया गया है। लेकिन सचाई यह है कि वर्तमान समय में भी महिलाओं को उनके कम दर्जा ही दिया गया है। आज भी बेटियों के रूप में नहीं अपनाया जाता, महिला की किसानों में गिनती नहीं होती। असली सम्मान महिला का तब होगा जब सामाजिक क्षेत्र, राजनीतिक क्षेत्र व सरकारी नौकरियों में बराबर का हक मिलेगा।
सुमन कश्यप का कहना है कि सरकार द्वारा बेटी बचाव बेटी पढ़ाओ का नारा तो दे दिया गया है, लेकिन बेटियां वर्तमान समय में भी सुरक्षित नहीं हैं। समाज में महिला नशे को लेकर पहले भी ऐसे ही दुखी थी, आज भी दुखी है। देश में आज भी महिलाओं को वो सम्मान नहीं मिला जो मिलना चाहिए।
महिला शर्मिला ने बताया कि महिलाओं के पास वर्तमान में भी बराबरी का हक नहीं है। महिलाएं आज भी अपने अधिकारों से वंचित है। सरकार द्वारा महिलाओं को जागरूक करने के लिए समय समय पर अभियान चलाना चाहिए। आधुनिक समय मे महिलाओं के लिए सकारात्मक सोच की जरूरत है।
महिला सीमा का कहना है कि दुनियाभर में महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़कर अपना योगदान दे रही हैं। शिक्षा, नौकरी या राजनीति, महिलाएं पुरुषों के बराबर अपने हक पर अडिग हैं। जिन महिलाओं को आज प्रताड़ित किया जा रहा है, उनके लिए भी महिला हेल्पलाइन बनाई गई है।