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हम सबकी प्यारी हिंदी, भारत के माथे की है बिंदी : सतीश

Mon, 15 Sep 2025 03:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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कैथल। साहित्य सभा की मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन रविवार को आरकेएसडी काॅलेज में किया गया। इस दौरान रचनाकारों ने अपनी रचनाआें के माध्यम से हिंदी का बखान किया।
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सतीश शर्मा ने इन पंक्तियों से हिन्दी का महत्व बताया। उन्होंने अपनी रचना पढ़ी। ‘हम सबकी प्यारी हिन्दी भारत के माथे की बिंदी’। श्याम सुंदर गौड़ ने सदा शिव भजन मन निशदिन शंकर गौरी-पार्वती रमा सुनाकर दर्शकों की वाहवाही लूटी।
इस मौके पर सुरेश कल्याण ने हिंदी की महिमा इन शब्दों में व्यक्त की ‘चेहरे की मुस्कान है हिंदी, हम सबका स्वाभिमान है हिंदी’। गोष्ठी में राजेश भारती की गजल उंगलियों पर जब नचाया वक़्त ने, शाह को दर-दर घुमाया वक्त ने सुनाया, जिसे लोगों की सराहना मिली। अनिल कौशिक ने कहा कि हमें वाचन, पाठन, लेखन, दिनचर्या में हिन्दी का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने पिछले माह में हुई सभा की साहित्यिक उपलब्धियों का जिक्र किया गया।
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सतपाल पराशर आंनद ने कहा कि आग लगावै पहला खुद जाकै, फेर बुझावै। गंगाराम ने अपनी रचना में आज की पत्रकारिता पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि वाहवाही में कलम चलाई जा रही है, जनता की आवाज दबाई जा रही है। इस मौके पर ईश्वर गर्ग , प्रीतम लाल शर्मा, पूजा शर्मा, महेंद्र पाल, कमलेश शर्मा, मधु गोयल, सोहन लाल सोनी ने भी काव्यपाठ किया। अंत में अध्यक्ष अमरत लाल मदान ने टिप्पणी की और अपनी कविता की पंक्तियों से दर्शकों की तालियां बटोरीं। उनकी रचना, जीना है तो क्यूं न उमंग में जीएं, रोम - रोम उमंग लिए जिएं को लोगों ने काफी सराहा। संवाद
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