22-कैथल। पुराने अस्पताल का दृश्य।
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जिले में पहले के मुकाबले हेपेटाइटिस-सी के मरीज कम हुए हैं, लेकिन इसकी अनदेखी खतरे से खाली नहीं है। मीठे जहर नाम से जानी जाने वाली इस बीमारी के लिए सरकार की ओर से निशुल्क दवा का प्रावधान है। ऐसे में समय रहते उपचार से हम इसके खतरों को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार थकान, भूख न लगना, आंखों और त्वचा का पीलापन हेपेटाइटिस सी के लक्षण हैं। इसके संक्रमण से व्यक्ति का लीवर क्षतिग्रस्त हो जाता है। करीब सात आठ साल पहले तक इस बीमारी का इलाज काफी महंगा था, लेकिन सरकार द्वारा इस बीमारी के इलाज के लिए निशुल्क दवा का प्रावधान किए जाने के बाद से इस पर नियंत्रण हुआ है। जानकारी के अनुसार जिले में वर्ष 2017 में 1738 मरीज रजिस्टर्ड थे। अगले साल 2018 में 1707 मरीज रजिस्टर्ड हुए।
वहीं वर्ष 2019 में 1953 मरीज रजिस्टर्ड हुए और 2020 में कुल 1550 मरीज सामने आये। चालू वर्ष में अभी तक 641 मरीज पंजीकृत हुए हैं जो पिछले सालों के मुकाबले काफी कम हैं। हालांकि यह सरकारी अस्पतालों के आंकड़े हैं, इसके अलावा निजी अस्पतालों में भी उपचार के लिए लोग पहुंचते हैं जो इससे अलग है। सीएमओ डॉ. शैलेंद्र ममगाईं ने बताया कि हेपेटाइटिस ऐसी खतरनाक बीमारी है, जिसके संक्रमण से लीवर में सूजन आ जाती है।
हेपेटाइटिस-बी और सी का वायरस शरीर में कई साल तक शांत रह सकता है। इससे क्रॉनिक हेपेटाइटिस-सी का खतरा बना रहता है। शुरू में इसके लक्षण समझ में नहीं आते। कुछ दिन बाद थकान महसूस होना, भूख न लगना, पेट दर्द होना, सिर दर्द होना, चक्कर आना और पेशाब का पीला रंग होना जैसी समस्याएं सामने आती हैं। उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार द्वारा हेपेटाइटिस उपचार कार्यक्रम के तहत बीमारी के निशुल्क उपचार की सुविधा दी जाती है।