जिले में एंबुलेंस सेवाएं सिसकने के बाद अब दम तोड़ती नजर आ रही हैं। 14 में से 6 एंबुलेंस कंडम हो चुकी हैं, वहीं एक गाड़ी अभी खराब पड़ी है। जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। यदि बड़ा हादसा हो जाए तो घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। इसलिए आप भी यदि कहीं कोई बड़ा हादसा देखें तो सिवाय एंबुलेंस का इंतजार करने के, खुद ही घायलों की सहायता करने का प्रयास करें। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने कुछ दिनों पहले चार नई एंबुलेंस दी हैं। जो इको वैन हैं, इनमें कोई बड़ी गाड़ी नहीं हैं।
साढ़ेे तीन लाख किलोमीटर से अधिक चल चुकी हैं छह गाड़ियां
सड़क पर चलने के लिए एक गाड़ी की लाइफ करीब साढ़े तीन लाख किलोमीटर की है। लेकिन छह एंबुलेंस ऐसी हैं, जो साढ़े चार लाख से लेकर साढ़े छह लाख किलोमीटर तक चल चुकी हैं। नियम के अनुसार इन गाड़ियों को सड़कों पर दौड़ाना खतरे से खाली नहीं है। लेकिन एंबुलेंस चालक फिर भी गाड़ियां चला रहे हैं। जो ना केवल उनकी जान के लिए बल्कि मरीजों की जान के लिए भी बड़ा रिस्क है।
प्रतिदिन आती है 70 से 90 के बीच में रेफर कॉल्स
एंबुलेंस रेफर के लिए जिला अस्पताल से प्रतिदिन 70 से 90 कॉल्स आती हैं। ऐसे में 12 गाड़ियों में रेफर करने व मरीजों का लाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार मरीजों को बाहर से प्राइवेट एंबुलेंस पैसे देकर ले जानी पड़ती है।
आबादी के हिसाब से करीब 6 एंबुलेंस की और जरूरत
जिले की आबादी के अनुसार अभी भी छह एंबुलेंस की ओर आवश्यकता है। प्रतिदिन आने वाली कॉल्स के अनुसार लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पीजीआई रेफर के लिए केवल तीन गाड़ियां है। ऐसे में पटियाला, चंडीगढ़, रोहतक रेफर करने के कारण कई बार समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
नई ईको गाड़ी में नहीं है सुविधाएं
जिला अस्पताल में कुल 14 एंबुलेंस में से 6 कंडम हैं, 1 खराब खड़ी है। कंडम में से 4 गाड़ियों को रिस्क लेकर चलाया जा रहा है। इन पुरानी गाड़ियों में से 11 गाड़ियां किसी तरह चल रही हैं। लेकिन नई चार गाड़ियों में महज एक-एक मरीज मुश्किल से आता है। इसलिए इस ईको गाड़ी को एंबुलेंस के लिए उपयुक्त नहीं माना जा रहा। इसकी लंबाई कम है। जो पूर्व में गाड़ियां हैं, वे एंबुलेंस के लिए सही फिट बैठती हैं।
इसी माह नई चार एंबुलेंस विभाग ने भेजी हैं। पुरानी गाड़ियों को भी ठीक करवाया गया है। आगे भी जो परेशानी होगी, उसे दूर कर दिया जाएगा। एंबुलेंस संबंधी कोई परेशानी फिलहाल नहीं हैं।
डा. मनीष बंसल, सीएमओ, कैथल