संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जिले में बच्चों के स्वास्थ्य को संवारने के उद्देश्य से चलाया जा रहा स्वास्थ्य विभाग का राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम जरूरतमंद परिवारों के बच्चों के लिए बड़ी राहत साबित हो रहा है। इस अभियान के तहत अब तक जिले में 38 बच्चों की निःशुल्क सर्जरियां की जा चुकी हैं।
विभाग की ओर से स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अध्ययनरत बच्चों की जांच के लिए 11 टीमों का गठन किया गया है। प्रत्येक टीम में एक पुरुष व एक महिला चिकित्सक, एक फार्मासिस्ट और एक एएनएम कार्यकर्ता शामिल हैं। ये टीमें स्कूलों में वर्ष में एक बार तथा आंगनवाड़ी केंद्रों में दो बार जाकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच करती हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान जिन बच्चों में सामान्य बीमारियां पाई जाती हैं, उन्हें संबंधित पीएचसी में उपचार के लिए भेजा जाता है, जबकि गंभीर बीमारियों वाले बच्चों को बड़े अस्पतालों में रेफर किया जाता है।
इस वर्ष अब तक 38 बच्चों की सर्जरी करवाई जा चुकी है, जबकि पिछले वर्ष 83 और 2023 में 78 सर्जरियां की गई थीं। इस कार्यक्रम के तहत पिछले एक वर्ष में 1000 जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क चश्मे भी वितरित किए गए हैं।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्म दोष, बीमारियां, कमियां और विकास में देरी जैसी स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान कर निःशुल्क उपचार किया जाता है।
वहीं राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके) के अंतर्गत 10 से 19 वर्ष तक के किशोरों में पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, चोट, हिंसा और नशे की आदतों जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए कार्य किया जा रहा है।
सरकारी कार्यक्रम के माध्यम से जिले के सभी जरूरतमंद बच्चों को नि:शुल्क सर्जरी और उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। इसमें जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों में चार प्रमुख श्रेणियों—जन्म दोष, रोग, कमियां और विकास में देरी—की पहचान कर तृतीयक स्तर तक उपचार व सर्जरी की सुविधा दी जा रही है। - डॉ. विकास धवन, उप सिविल सर्जन, कैथल
कार्यक्रम के अंतर्गत जांची जाने वाली प्रमुख स्वास्थ्य स्थितियां
जन्म के समय दोष:
तंत्रिका ट्यूब दोष, डाउन्स सिंड्रोम, कटे होंठ व तालु, क्लब फुट, कूल्हे का विकासात्मक दोष, जन्मजात मोतियाबिंद, जन्मजात बहरापन, जन्मजात हृदय रोग, समयपूर्व रेटिनोपैथी।
बचपन की बीमारियां:
त्वचा संबंधी संक्रमण, मध्यकर्णशोथ, आमवाती हृदय रोग, प्रतिक्रियाशील वायुमार्ग रोग, दंत क्षय, आक्षेप विकार।
विकास में देरी:
दृष्टि दोष, श्रवण बाधा, न्यूरो-मोटर दुर्बलता, मोटर विलंब, संज्ञानात्मक विलंब, भाषा विलंब, व्यवहार विकार (ऑटिज़्म), सीखने की कठिनाई, ध्यान अभाव सक्रियता विकार।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य मिशन के तहत सर्जरियों का ब्योरा
वर्ष
सर्जरियां
2023
78
2024
83
2025
38 (अब तक)