संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। दयोहरा गांव के राजकीय स्कूल में विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये के गबन का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने स्कूल के मुख्य अध्यापक पर 48 लाख रुपये से अधिक की राशि में हेराफेरी के गंभीर आरोप लगाए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा विभाग ने 19 जुलाई 2024 को स्कूल की चहारदीवारी सहित अन्य विकास कार्यों के लिए 48 लाख 31 हजार 124 रुपये की ग्रांट जारी की थी। इस राशि से नई दीवार तो बनाई गई, लेकिन दीवार की नींव तक नहीं भरी गई, बल्कि पुरानी नींव पर ही नई दीवार खड़ी कर दी गई। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण में पुरानी ईंटों का इस्तेमाल किया गया है।
ग्रामीणों के अनुसार, विकास कार्यों के नाम पर खर्च दिखाया गया, लेकिन 15 लाख रुपये से अधिक का काम जमीन पर नहीं दिखता। उनका कहना है कि संपूर्ण 48 लाख रुपये के खर्च की पारदर्शी जांच होनी चाहिए, ताकि असलियत सामने आ सके। ग्रामीण सुशील कुमार ने बताया कि चहारदीवारी के निर्माण में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं। यह कार्य तत्कालीन हेड टीचर की देखरेख में हुआ था, जो काम पूरा होने के तुरंत बाद तबादला करवाकर दूसरे स्कूल में चले गए।
इस संबंध में वर्तमान प्रिंसिपल इंदू गुप्ता ने कहा कि विभाग की ओर से ग्रांट आई थी, जिसे मैंने उस समय के हेड टीचर रामेश्वर को भेज दी थी। बाद में वे विकास कार्यों के बिल लेकर आए, जिनसे मैं भी संतुष्ट नहीं थी। इस पर मैंने विभाग को पत्र लिखकर जांच की मांग की है।
वहीं, मुख्य अध्यापक रामेश्वर ने सभी आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि यह सब साजिश के तहत किया जा रहा है। सभी कार्य नियमानुसार कराए गए हैं। पूरी ग्रांट का उपयोग हुआ है और 48 लाख 31 हजार 124 रुपये में से केवल 106 रुपये शेष बचे थे, जिन्हें विभाग के खाते में वापस जमा करा दिया गया है।