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Kaithal News: रूठा बेटा, अहंकार और जीवन के सवालों पर रखी अपनी बातें

Mon, 12 Jan 2026 01:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। साहित्य सभा कैथल की मासिक समीक्षा गोष्ठी रविवार को आरकेएसडी कॉलेज में आयोजित की गई। गोष्ठी की शुरुआत राजेश भारत ने अपनी पंक्तियों से की। उन्होंने कहा- “क्या भूख है जमाने में, सब व्यस्त हैं बस खाने में।”

इसके बाद सुरेश कुमार कल्याण ने अपनी कविताओं से श्रोताओं का मन मोह लिया। उन्होंने कहा- “रूठा बेटा बाप से ऐंठ रहा पुरजोर, मिन्नत करता बाप अब कलयुग आया घोर।” बलवान कुंडू ने कहा- “बंदूक, बारूद, तलवार किसी को नहीं मारते, मारता है आदमी का अहंकार।”
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दिनेश बंसल ने कहा- “जो साथ तुम्हारे थी वो तलवार किधर है, सर को तो बचा लाए हो दस्तार किधर है।” रवींद्र कुमार रवि ने कहा- “बुजुर्गों से न करता मशविरा जो, वकीलों के वो चक्कर काटता है।” अनिल कौशिक ने नववर्ष की बधाई दी - “किसी नूं हत्थी, किसी नूं पैरीं, किसी नूं मत्थे चुम्म के नवें साल दियां शुभकामनावां।”

रामफल गौड़ ने कहा - “जौन सी उसनै बात बताई, ना चेहरे नै देई गंवाई।” यात्री गंगा ने कहा - “जिसका जवाब न हो मेरे ज़हन में, ऐसा कोई सवाल न रहा।” श्याम सुंदर शर्मा ने कहा - “वक्त आ रहा जहां से जाने का।” शमशेर कैंदल ने कविता ‘दूर दराज का मंदिर’ प्रस्तुत की। ईश्वर चंद गर्ग ने कहा - “सांझा चूल्हा सांझा भात, कब की हो गई बीती बात।” सोहन लाल सोनी ने कहा - “दर्द में डूबा हुआ बंदा, खुद से ऊबा हुआ बंदा।” डाॅ. चतरभुज बंसल ने कहा - “डूब गया क्यूं बेईमान, म्हारे कुल की लाज क्यूं खोई रै।” ममता अग्रवाल ने स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि दी - “सात समंदर पार खड़ा था भगवां ओढ़े इक संन्यासी।”
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राजपाल गुलाटी ने कहा- “राम का कोई खरीदार नहीं।” प्रीतम शर्मा ने “गाय और शेर” कविता प्रस्तुत की। रिसाल जांगड़ा ने कहा- “नाव डुबोई है मल्लाह ने, इल्जाम लगा तूफानों पर।” डाॅ. हरीश चंद्र झंडयी ने कहा - “आज है कैसी चकाचौंध सी जिंदगी, खुशियों की महक नहीं।”कमलेश शर्मा ने कहा - “बोलता जाता है तूं, लिखता जाता हूं मैं।” अध्यक्षीय उद्बोधन अमृत लाल मदान ने दिया और अपनी कविता प्रस्तुत की - “महसूस होता है इस बुढ़ापे में कि मन की भी एक देह होती है छुई मुई सी।”
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