लावारिस शव का अंतिम संस्कार कराते संस्था के सदस्य। सौ संस्थ
कैथल। जिले में हर माह दर्जनों ऐसे लोग दुनिया से विदा हो जाते हैं, जिनको अंतिम समय में अपना कहने वाला कोई नहीं होता। न साथ देने वाला और ही कंधा देकर श्मशान घाट तक लेकर जाने वाला, लेकिन कैथल में जीवन रक्षक दल संस्था है जिसने लावारिस शवों के अंतिम संस्कार कराने की जिम्मेदारी को ही जिंदगी बना लिया है।
इस संस्था को 2017 में राजू डोहर ने शुरू किया था। अब इसमें 20 सदस्य हैं। जो दिन-रात सेवा में लगे रहते हैं। जीवन रक्षक दल संस्था के सदस्य अब तक 184 अनजान शवों का संस्कार कर चुके हैं। राजू डोहर ने बताया कि 184 अनजान शवों का संस्कार कर चुके हैं, जिसमें से 18 आदमियों की पहचान हो चुकी है और उनके घर वालों को हमने उनकी अस्थियां दे दी। हर 4 महीने के बाद अस्थियों को लेकर हरिद्वार में गंगा में विसर्जन करते हैं। ब्राह्मणों के साथ रिति रिवाज से पूरी क्रिया कराई जाती है। ताकि मृतक की आत्मा को पूर्ण रूप से शांति मिल सके। बता दें कि सड़क किनारे मिले शव हो या अस्पताल में बिना पहचान के दम तोड़ चुके लोग हो, संस्था के सदस्य उन्हें बिना किसी स्वार्थ के कंधा देते हैं। उनका अंतिम संस्कार करते हैं। यही समाज में असली मानवता का संदेश देती है।
घायल पशुओं का कराते उपचार
उन्होंने बताया कि संस्था के सदस्यों की ओर से रक्तदान करते हुए जरूरतमंदों को रक्त भी उपलब्ध कराया जाता है। नाले में कहीं कोई पशु या गोवंश गिर कर चोटिल हुआ हो, कोई पक्षी, बंदर घायल हो तो उसका उपचार भी कराया जाता है। अभी तक 17 घायल बंदरों का इलाज करवा चुके हैं। पतंग की डोर से घायल कबूतरों को बचा चुके हैं। गरीब बच्चों की सहायता करना जैसे किताबें वे जुराब जूते देना आदि समाज कार्य करते हैं। 19 मार्च 2017 को देवव्रत आचार्य ने कैथल में संस्था का उद्घाटन किया था।