सरकारी स्कूलों में टैब वितरण के बाद 10वीं, 11वीं और 12वीं में पढ़ने वाले सैकड़ों विद्यार्थियों ने पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी है। कैथल जिले में ही ऐसे विद्यार्थियों की संख्या 600 से अधिक बताई जा रही है। ऐसे में प्रदेश में टैब वितरण के बाद स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या हजारों में है। अब स्कूल छोड़ चुके बच्चों से टैब रिकवरी की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को सौंपी है। ऐसे में बच्चों को तलाशने में गुरुजी के पसीने छूट रहे हैं।
सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को जुलाई 2022 में टैब बांटे गए थे। उस समय विभिन्न स्कूलों में बांटने के लिए विभाग की ओर से जिले में 27 हजार 672 टैब भेजे गए थे। उनमें से विभाग के पास इस समय 249 टैब स्टॉक में हैं। बाकी तीनों कक्षाओं में पढ़ रहे विद्यार्थियों को बांटे जा चुके हैं। स्थिति यह है कि जिले में 155 से ज्यादा राजकीय उच्च और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हैं।
इनमें प्रत्येक में औसतन चार से पांच बच्चे टैब वितरण के बाद स्कूल छोड़ चुके हैं। ये बच्चे आज तक स्कूल बदलने का प्रमाणपत्र (एसएलसी) तक नहीं लेने गए हैं। ऐसे में अब शिक्षा विभाग की ओर से टैब वापसी कराने के निर्देश ने शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
बताया जा रहा है कि शिक्षक अगर टैब के बारे में पूछते हैं तो अभिभावकों की ओर से जवाब मिलता है कि बच्चे काम सीखने लगे हैं, आगे पढ़ाई नहीं कर रहे। वे इस बारे में बच्चों को कहकर जल्द से जल्द टैब स्कूलों में पहुंचा देंगे।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कैथल के प्रिंसिपल रविंद्र कुमार ने बताया कि उनके स्कूल से इस सत्र में चार-पांच विद्यार्थियों ने पढ़ाई अधर में छोड़ी है। इन बच्चों को दिए गए टैब अभी तक वापस जमा नहीं हुए हैं।
वहीं राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ट्योंठा के प्रिंसिपल विनय गुलाटी ने कहा कि सत्र में तीनों कक्षाओं के चार विद्यार्थियों ने स्कूल छोड़ा है। शिक्षक आज भी उनको दिए गए टैब वापस आने के इंतजार में हैं। जिले और प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में टैब वितरण के बाद कमोवेश यही स्थिति बनी है।
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी रविंद्र चौधरी ने कहा कि टैब वापस करवाने को लेकर स्कूलों के प्रबंधन और विद्यार्थियों को अवगत करवाया गया है। स्कूलों और बच्चों के अभिभावकों की जिम्मेदारी बनती है कि वे समय अनुसार बच्चों के टैब स्कूलों में जमा करवाएं। इस संबंध में विभाग के जो भी निर्देश होंगे, उनका पालन किया जाएगा।