संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। सरकारी भंडारण स्थलों पर खरीदे गए गेहूं के रखरखाव में गंभीर लापरवाही सामने आई है। सरकार द्वारा खरीदे गए अनाज को गुणवत्तापूर्ण तरीके से संग्रहित करने की जिम्मेदारी अधिकारियों पर थी, लेकिन समुचित प्रबंधन के अभाव में यह अनाज अब बर्बाद हो रहा है।
हाल ही में मुख्यमंत्री उड़नदस्ता और विभिन्न सरकारी विभागों की टीम ने भंडारगृह स्थलों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान न केवल गेहूं सड़ा हुआ पाया गया, बल्कि भंडारण में प्रयुक्त बारदाना और लकड़ी के क्रेट भी नष्ट हो चुके थे। स्थिति इतनी गंभीर है कि भंडारण केंद्र किसी खुले कूड़ाघर जैसी स्थिति में दिखाई दिया। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि सरकार की ओर से खरीदे गए गेहूं को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त बजट खर्च किया जाता है, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण अनाज नमी, बारिश और कीटों का शिकार हो रहा है। यह अनाज वास्तव में जरूरतमंदों तक पहुँचना चाहिए था, लेकिन कोताही ने इसे बेकार कर दिया।
मुख्यमंत्री उड़नदस्ता की जांच के बाद भी संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की गई। लोग सरकार से मांग कर रहे हैं कि लापरवाह अधिकारियों की सूची बनाकर त्वरित कार्यवाही की जाए और भविष्य में अनाज संरक्षण के लिए ठोस नीति बनाई जाए।
कलायत में यह पहला मामला नहीं है। पूर्व में भी भंडारण में कोताही अनाज खराब होने की घटनाएँ सामने आई हैं।
अनाज के समुचित रख-रखाव के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो अनाज खराब हो गया है, उसकी बोली लगाकर उचित निस्तारण किया जाएगा। -नवीन कुमार, इंस्पेक्टर, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग
17kht_38_कलायत में भंडारण स्थल का मुआयना करते खाद्य एवं आपूर्ति निरीक्षक नवीन कुमार व कर्मी