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Kaithal News: सरकार दे विकल्प, नहीं तो लड़ेंगे कानूनी लड़ाई

Tue, 20 May 2025 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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सीवन। पोलड़ के ग्रामीण इन दिनों भारी तनाव और नाराजगी में हैं। पुरातत्व विभाग की ओर से गांव को खाली करने का नोटिस भेजे जाने के बाद से पूरे गांव में हलचल मच गई है। ग्रामीणों का कहना है कि चाहे कुछ भी हो जाए, वे अपना गांव नहीं छोड़ेंगे।

नाराज ग्रामीणों ने एक सुर में कहा कि यह पहली बार नहीं है जब इस प्रकार का नोटिस आया हो। इससे पहले भी तीन बार खोदाई की जा चुकी है, लेकिन कोई पुरातात्विक अवशेष नहीं मिले। उनका कहना है कि यदि यहां कुछ ऐतिहासिक दबा होता, तो पहले ही मिल गया होता।
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ग्रामीणों का कहना है कि जब देश आजाद हुआ था, तब से वे इस गांव में रह रहे हैं। उन्होंने इसे अपने खून-पसीने से बसाया है। मेहनत मजदूरी करके घर बनाए हैं और अब अचानक गांव खाली करने का आदेश आ गया है, जो सरासर गलत है।

ग्रामीणों की मांग है कि यदि सरकार को यह स्थान किसी परियोजना या धरोहर स्थल के रूप में चाहिए, तो पहले उन्हें पुनर्वासित किया जाए, किसी अन्य स्थान पर मकान देकर।

पोलड के निवासियों का यह संघर्ष केवल जमीन का नहीं, बल्कि अपनी जड़ों और पहचान को बचाने का है। सरकार और प्रशासन को इस मामले में संवेदनशीलता और समझदारी से कदम उठाने की जरूरत है, ताकि विकास और विरासत की रक्षा के साथ-साथ ग्रामीणों के जीवन पर भी कोई संकट न आए।

दरगाह में होती है विशाल मेला

शहंशाह नौ गजा पीर की प्रसिद्ध दरगाह भी स्थित है। यहां हर साल नौ व 10 जून को विशाल मेले का आयोजन किया जाता है जिसमें दूर-दराज से श्रद्धालु आते हैं।

राजनीतिक और कानूनी मोर्चा भी तैयार ः ग्रामीणों ने अब कुरुक्षेत्र से भाजपा सांसद नवीन जिंदल और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मिलने का समय मांगने की योजना बनाई है। उनका कहना है कि वे गांव को उजाड़ने के खिलाफ आवेदन देंगे। उन्होंने कहा कि यदि कोई समाधान नहीं निकला तो वे कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
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धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व का दावा

मान्यता है कि पोलड़ रावण के दादा, पुलस्त्य मुनि की तपोस्थली रहा है। ऐसी कहा जाता है पुलस्त्य मुनि ने यहां सरस्वती नदी के किनारे स्थित इक्षुपति तीर्थ पर तपस्या की थी। वहीं, रावण का बचपन भी यहीं बीता था। यह स्थान धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां मां सरस्वती का एक मंदिर है, जो सरस्वती नदी के किनारे स्थित है। इस साथ ही एक गोशाला भी है जहां नियमित रूप से गायों की सेवा की जाती है। सरकार यहां सरस्वती नदी पर रिवर फ्रंट का निर्माण भी कर रही है ताकि इसे एक प्रमुख टूरिस्ट स्थल के रूप में विकसित किया जा सके।
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