पाई। भारतीय किसान यूनियन ने सरकार से मोटे धान के साथ-साथ बारीक धान का भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित करने की मांग की है। भाकियू के राष्ट्रीय सलाहकार अजीत सिंह हाबड़ी और कार्यकारी अध्यक्ष बलवान पाई ने कहा कि सरकार हर वर्ष केवल मोटे धान का एमएसपी घोषित करती है, जबकि बारीक धान की किस्मों के लिए अब तक कोई समर्थन मूल्य तय नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि बारीक धान की खरीद मुख्य रूप से निर्यातकों द्वारा की जाती है, जो किसानों से मनमाने दामों पर फसल खरीदते हैं। कई बार किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
5000 से 7000 रुपये तक एमएसपी की मांग
किसान नेताओं ने मांग की है कि 1509, 1718, 1885 और 1401 जैसी बारीक धान की किस्मों का न्यूनतम समर्थन मूल्य कम से कम 5000 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया जाए। वहीं बासमती धान का एमएसपी 7000 रुपये प्रति क्विंटल तय किया जाना चाहिए। इसके अलावा मोटे धान का समर्थन मूल्य भी बढ़ाकर कम से कम 3000 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए।
समय पर घोषणा की मांग
उन्होंने कहा कि करीब एक से डेढ़ महीने बाद धान की रोपाई शुरू हो जाएगी और किसान समर्थन मूल्य को ध्यान में रखकर ही धान की किस्मों का चयन करते हैं। इसलिए सरकार को समय रहते मोटे और बारीक दोनों प्रकार की धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करना चाहिए। भाकियू नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि किसानों को उनकी फसल का उचित दाम नहीं मिला तो खेती लगातार घाटे का सौदा बनती जाएगी।