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Kaithal News: सरकारी दावे हवा, मंडियों में धान खरीद लटकी, सीएम विंडो तक पहुंचे किसान

Wed, 29 Oct 2025 01:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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नई मंडी में लगे धान के ढेर। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। धान खरीद सीजन के बीच मंडियों में सरकारी खरीद एजेंसियों के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। किसानों की फसल सरकारी दर पर न बिकने से नाराज किसान अब मुख्यमंत्री विंडो तक जा पहुंचे हैं।

गांव ग्योंग निवासी किसान सतपाल ने शिकायत कर कहा कि उसकी चार एकड़ की फसल नई मंडी में दुकान नंबर 25 पर सात दिन से पड़ी है। धान को डीएफएससी, हैफेड के निरीक्षकों ने चेक कर 14-15 नमी के साथ पास कर रखा है, बावजूद इसके उसका धान सरकारी रेट पर नहीं खरीदा जा रहा है।
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सतपाल का आरोप है कि एजेंसी निरीक्षक जानबूझकर कमी निकाल रहे हैं, जबकि व्यापारी 2,225 रुपये प्रति क्विंटल देने की बात कह रहे हैं। किसान ने उपायुक्त को भी शिकायत दी, मगर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

इधर, सरकार ने मंडियों में गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए गेटपास और राइस मिलर में फिजिकल वेरिफिकेशन के आदेश दिए हैं
मंडियों का हाल (मीट्रिक टन में, अपराह्न 3:30 बजे तक)
मंडी
आवक
खरीद

अमोली 8947
8947

भागल
3026
3026

चीका
302595
300536

ढांड
152239
149742

धनौरी
3920
3701

एक्सटेंशन मंडी
87514
86977

कलायत 16874
16013

कौल
13119
13119

नई मंडी
104433
103884

पुरानी मंडी
8645
8595

पाई
12440
11847

पुंडरी
94486
93831

राजौंद 14522
14451

रामथली 31675
31675

सीवन
24094
24072

कुल
8,78,095
8,69,679

ऐसे चलता है खेल

धान खरीद में सरकारी एजेंसियां- खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, हैफेड और वेयरहाउस मिलकर खरीद करती हैं। इसमें आढ़ती भी भूमिका निभाते हैं। जानकारों के अनुसार, तीनों मिलकर किसान की फसल में नमी या गुणवत्ता का बहाना लगाकर खरीद टालते हैं। किसान मजबूर होकर एमएसपी से कम रेट पर फसल बेच देता है। आढ़ती कच्ची पर्ची बनाकर ऊपर के पैसे बाद में वसूल लेते हैं।

स्थानीय किसान हो रहे परेशान ः विक्रम कसाना

भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के युवा प्रदेशाध्यक्ष विक्रम कसाना ने कहा कि मंडियों में दूसरे राज्यों का धान खुलेआम खरीदा जा रहा है, जबकि स्थानीय किसानों की फसल को दरकिनार किया जा रहा है। कई बार बाहर की गाड़ियां पकड़कर अधिकारियों को दिखाई गईं, लेकिन मिलीभगत से सब कुछ दबा दिया जाता है। कोई कार्रवाई नहीं की जाती। आरोप लगाते हुए कहा कि मिलीभगत से किसानों को लूटा जा रहा है।
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इस संदर्भ में मार्केट कमेटी सचिव नरेंद्र ढुल ने कहा कि इस संबंध में हैफेड डीएम से बात हो चुकी है। संबंधित निरीक्षक को तुरंत खरीद के निर्देश दिए गए हैं। किसानों की फसल सरकारी समर्थन मूल्य पर ही खरीदी जा रही है।
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