संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। शहर के लक्ष्मी नारायण मंदिर में आयोजित सात दिवसीय महा शिवपुराण कथा वीरवार को तीसरे दिन भी जारी रही। इस कथा के तीसरे दिन भी 1008 महामंडलेश्वर स्वामी यमुनापुरी ने भगवान शंकर जी के बारे में बताया। कहा कि प्रभु सृष्टि में होते हुए भी हमें नहीं दिखाई देते।
कथा सुनाते हुए 1008 महामंडलेश्वर स्वामी यमुनापुरी कहा कि व्यक्ति दो प्रकार के होते हैं, एक तो साकार व दूसरा निराकार। संपूर्ण श्रृष्टि जैसे एक बीज से मूलांकुर और प्रांकुर दोनों ही निकलते हैं। उससे निर्मित होती है उनमें बीज का अंश होते हुए भी दिखाई नहीं देता, वैसे ही सारी सृष्टि में प्रभु होते हुए भी हमें दिखाई नहीं देते। हम केवल साकार रूप दिखाई देता है। निराकार रूप हम आसानी से पहचान नहीं पाते। साकार रूप पहचान लेते हैं। उन्होंने कहा कि शंकर जी कहते हैं अगर किसी ने बुराई कर दी तो उसको ना निगलो ना उगलो, मतलब ना उस बुराई को दिल पर लो और ना उसको बाहर निकालो। क्योंकि एक ही चार बातें निकलेंगी। इसलिए ना उसको निगलो ना उगालो। उन्होंने कहा कि शंकर जी कहते हैं कि किसी भी समस्या से घबराने की जरूरत नहीं है। क्योंकि समस्या से ही हमें अपने और अपनों का पता लगता है। जीवन में जब सुख मिले समझना अच्छे कर्मों का फल मिल रहा है। जीवन में जब भी दुख मिले समझना अच्छे कर्मों करने का समय आ गया है। सुख, दुख, यश व अपयश में बैलेंस बनाना आना चाहिए।
कथा में सैंकड़ो की संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण करने के लिए पहुंचे। सदस्य मनोज सिंगला व मोनू गोयल ने बताया कि कथा में दिन प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या बढती जा रही है। कथा के समापन पर विशाल भंडारे लगाया जाता है। जिसमें सैंकड़ों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते है।
इस मौके पर राम प्रताप गोयल, मनोज सिंगला, पवन गर्ग, गौतम अग्रवाल, मोनू गोयल, संजीव चौधरी, सुरेंद्र आरेवाले, सुशील गर्ग, पप्पू आरेवाले, राकेश गर्ग, रतन लाल, गोपाल गर्ग, राम कैलाश गोयल, सुरेंद्र किछाणिया व अन्य सदस्य मौजूद रहे।