कैथल। मध्य सत्र में दाखिला प्रक्रिया होने के कारण आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थी 134 ए के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश नहीं ले रहे हैं। विभाग ने जिले के 293 स्कूलों में दाखिले के लिए प्रथम ड्रॉ में 2299 विद्यार्थियों की सूची जिस उम्मीद से जारी की है, उसके अनुसार अब तक दाखिले नहीं हो पाए हैं। हालांकि अब तक हुए दाखिले और खाली सीटों का ब्योरा जिले के अनुसार उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि अब तक केवल 20-25 प्रतिशत ही दाखिले हुए हैं।
नियम के तहत विद्यार्थी केवल शहर के निजी स्कूलों में दाखिला लेने में रुचि दिखा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में दाखिला लेने वालों की संख्या न के बराबर है। अभिभावकों के एसोसिएशन के सदस्यों का कहना है कि इस बार 134 ए की दाखिला प्रक्रिया दिखावे से ज्यादा कुछ नहीं रही है। अब अगर किसी निजी स्कूल में बच्चे को भेज भी दें तो कोई फायदा नहीं होगा। पहले ढंग से कक्षाएं नहीं लग पाईं और अब शुरू हुई हैं तो बच्चों को इधर-उधर घुमाने में और दस्तावेज जुटाने में समय खराब हो जाएगा।
अभिभावकों का आरोप है कि इस बार विभाग दाखिला प्रक्रिया में लेटलतीफी करके खुद के साथ बच्चों का भी समय खराब कर रहा है। स्टूडेंट्स-पैरेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान मोनू बतरा, अनिल और गुरमीत ने कहा कि यह दाखिला प्रक्रिया उसी समय शुरू होनी चाहिए थी, जब बच्चों के सामान्य दाखिले हुए। अब मध्य वर्ग में बच्चे एक स्कूल से दूसरे स्कूल में जाएंगे तो उनका समय बर्बाद होगा। ये भी नहीं लगता कि बच्चे नए स्कूलों में ढंग से पढ़ाई शुरू कर पाएंगे या नहीं। जिला शिक्षा अधिकारी अनिल शर्मा ने कहा कि विभाग की ओर से जारी किए गए निर्देशों के अनुसार 134 ए के तहत निजी स्कूलों में बच्चों के दाखिले करवाए जा रहे हैं। इस बार दाखिला लेने वालों की संख्या अब तक कम है। ड्रॉ में शामिल बच्चों के अभिभावकों को चाहिए कि वे जल्द से जल्द अपने बच्चों के दस्तावेजों की जांच करवाकर उनको दाखिला दिलवाएं।