कैथल। देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 की क्रांति में कैथल के गांव फतेहपुर निवासी 25 साल के नौजवान गिरधर आहलूवालिया के बलिदान को कभी भूला नहीं जा सकता। स्वतंत्रता संग्राम में गिरधर आहलूवालिया ने एक अंग्रेज अफसर को गोली मार दी थी, जिसकी सजा देने के लिए अंग्रेजी अफसरों की एक टुकड़ी गांव फतेहपुर पहुंची थी। इस दौरान अपने पूरे गांव को बचाने के लिए आहलूवालिया ने अपने आप को पुलिस के हवाले कर दिया था।
इतिहासकार कमलेश शर्मा बताते हैं कि 1857 की क्रांति के दौरान फतेहपुर सहित कई गांवों में लोगों ने अंग्रेजों के प्रति बगावत की थी। उस समय कुछ अंग्रेज अधिकारी गांव मूंदड़ी नहर पर बने सिंचाई विभाग के रेस्ट हाउस में ठहरे थे। इस दौरान मौका पाकर गिरधर आहलूवालिया ने वहां ठहरे एक अंग्रेज अधिकारी को गोली से उड़ा दिया था। जब यह सूचना उस समय करनाल जिले में पहुंची तो वहां से अंग्रेज पुलिस के 250 जवान गांव फतेहपुर पहुंचे। साथ ही चेतावनी दी कि यदि गिरधर आहलूवालिया को पेश नहीं किया तो पूरे गांव को तोप से उड़ा दिया जाएगा।
इसके बाद गिरधर आहलूवालिया पूरे गांव को बचाने के लिए खुद ही सामने आए और हंसते-हंसते खुद को अंग्रेजों के हवाले कर दिया। इसके बाद अंग्रेज उन्हें लेकर कैथल की ओर चल दिए। इस बात की सूचना जब आस-पास के गांव के लोगों को लगी तो वे लाठियां व अन्य हथियार लेकर निकल पड़े, जिससे डरकर अंग्रेजों ने करनाल रोड पर काली माटी नामक जगह पर गिरधर आहलूवालिया को गोलियों से छलनी कर दिया और फिर भाग खड़े हुए।
सालों तक सुलिहान गोत्र ने नहीं मनाया था रक्षाबंधन
अंग्रेजों ने जिस दिन गिरधर आहलूवालिया को गोली मारी, उस दिन रक्षाबंधन पर्व था। इस कारण उस दिन से सुलिहान गोत्र के लोगों ने कभी रक्षाबंधन का पर्व नहीं मनाया। इसके बाद सरकार ने पूंडरी में गिरधर आहलूवालिया के सम्मान में उनके नाम से चौक बनवाया। उनकी प्रतिमा स्थापित कर इस गोत्र के लोगों से पर्व मनाने का आग्रह किया। उसके बाद सुलिहान गोत्र के लोगों ने रक्षाबंधन का पर्व मनाना शुरू किया।