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दिलाया विश्वास, किसानों के लिए किए जा रहे काम

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कैथल। डीसी डॉ. संगीता तेतरवाल ने लघु सचिवालय में कॉफी विद कलेक्टर कार्यक्रम में प्रगतिशील किसानों से संवाद किया। डीसी ने कहा कि सरकार और प्रशासन हर क्षेत्र में किसानों के उज्ज्वल भविष्य के लिए काम कर रहे हैं। हमारा प्रयास है कि कैथल के किसानों का रुतबा और बढ़े। जिले के किसान कई विषयों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके हैं, लेकिन हमें निरंतरता में आगे बढ़ने की जरूरत है। इस दौरान किसानों ने मांगें भी रखी, जिस पर समाधान का भरोसा दिया गया।
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डीसी ने कहा कि हमारे किसानों में ऐसी क्षमता और दक्षता है कि वे अपने मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर सकते हैं। फलों-फूलों, सब्जियों, दलहन, तिलहन, पशुपालन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन इत्यादि की खेती करके किसानों ने नाम कमाया है। किसान देश की प्रगति और आर्थिक व्यवस्था में बड़ा योगदान दे रहे हैं। यही कारण है कि हम किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर निपटाएंगे। कॉफी विद कलेक्टर कार्यक्रम में उपनिदेशक कृषि विभाग डॉ. कर्मचंद, जिला बागवानी अधिकारी प्रमोद सिंह सहारण, कृषि वैज्ञानिक डॉ. रमेश वर्मा सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
इस दौरान प्रगतिशील किसान गुरदयाल सिंह मलिकपुर ने कहा कि वह कई सालों से सब्जी का कारोबार कर रहे हैं और इससे अपनी आर्थिक स्थिति अच्छी की है। साथ ही पानी बचाने का काम भी किया है। मेरा पानी-मेरी विरासत सरकार की स्कीम है। वे पहले से ही जल संरक्षण करके अपने उत्पाद मार्केट में भेज रहे हैं। हरिगढ़ किंगन निवासी प्रगतिशील किसान बलविंद्र सिंह ने कहा कि वह पानी बचाने के प्रयासों में काफी समय से लगे हैं। गिरते हुए जलस्तर की बात ध्यान में रख खूंबी के साथ-साथ कम पानी का चारा जैसे ज्वार लगाई हुई है। इससे अच्छी आमदनी भी हो रही है। रसीना के प्रगतिशील किसान महेंद्र सिंह राष्ट्रीय अवार्डी ने कहा कि वह हर दो वर्ष बाद फसलों के विविधीकरण को अपनाते हुए खेती करने का काम करते हैं। डीसी ने कहा कि ऐसे किसानों के प्रयासों के चलते सरकार की स्कीमें सार्थक हो रही हैं।
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कॉफी विद कलेक्टर कार्यक्रम में किसानों ने मांग की है कि उन्हें समय पर सब्सिडी मिलनी चाहिए। इस पर डीसी ने कहा कि विभिन्न मदों के तहत सब्सिडी देने के बारे में समीक्षा बैठक का आयोजन किया जाएगा। इससे स्वयं ही समस्याओं का समाधान हो जाएगा। किसानों ने यह भी मांग रखी कि कृषि के कार्य में मनरेगा को भी शामिल कर लिया जाए। इस विषय को लेकर डीसी ने कहा कि हमारा प्रयास रहेगा और हम उच्च अधिकारियों से बात करेंगे। इस दौरान रविंद्र कुमार फरल, जगदीश नैन कैलरम, बिजेंद्र यादव, राजेश कुमार सिकंदरखेड़ी, विजय शर्मा डंडौता, महीपाल राणा आदि प्रगतिशील किसानों ने अपनी-अपनी समस्याएं बताईं।
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