लोगों का कहना है कि सड़कों से बेसहारा पशु पकड़ने का अभियान मात्र कागजों तक सीमित है। इस समय बेसहारा पशुओं की बढ़ती तादाद किसी भी समय हादसे का सबब बन सकती है। शहर के मुख्य रास्तों से लेकर शहर के बाजारों व गलियों तक हर जगह बेसहारा पशुओं के झुंड घूम रहे हैं। दिनों दिन समस्या विकराल हो रही है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन इस समस्या के प्रति गंभीर नहीं है। रात भर बेसहारा पशु सड़कों पर बैठे रहते हैं। छोटू राम चौक से लेकर, पिहोवा चौक से जींद रोड, अंबाला रोड, कुरुक्षेत्र रोड, पर सबसे ज्यादा बेसहारा पशु घूम रहे हैं। नगरपरिषद की तरफ से बेसहारा पशु पकड़ने के लिए टेंडर दिए जाते हैं। लाखों रुपये नगरपरिषद फाइलों में खर्च दिखाता है, लेकिन समस्या ज्यो की त्यो बनी हुई है। लोगों ने मांग की है कि बेसहारा पशुओं सड़कों से हटाए जाए, ताकि हादसों पर अंकुश लग सकें। संबंधित विभाग ने दावा किया है कि पिछले दो सालों में पांच हजार से ज्यादा बेसहारा पशुओं को सड़कों से हटा कर गोशालाओं में छोड़ा जा चुका है। फिलहाल अभियान चलाकर पशु हटाए जा रहे हैं। काफी पशु हटाए जा चुके हैं। संवाद
यहां जमावड़ा लगा रहता बेसहारा पशुओं का
माता गेट, छात्रावास रोड, चंदाना रोड, डोगरा गेट, भगत सिंह कालोनी, डिफेंस कॉलोनी, स्टेडियम के नजदीक, बस अड्डा के नजदीक, भगत सिंह चौंक, कबूतर चौंक, रेलवे गेट, कमेटी चौंक के पास पटवार भवन के नजदीक काफी संख्या में बेसहारा पशु बैठे रहते हैं।
खेती को नष्ट कर रहे बेसहारा पशु-रामनिवास
प्योदा के किसान रामनिवास ने बताया कि ग्रामीण स्तर पर बेसहारा पशु खेती को नष्ट कर रहे हैं। सरकार की तरफ से बेसहारा पशुओं के लिए विशेष प्रबंध नहीं है। शाम होते ही खेतों में बेसहारा पशु पहुंच जाते हैं। फिलहाल गेहूं व सरसों की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं।
कुछ ही दिनों में स्थिति फिर वही हो जाती: राजू
समाज सेवी राजू डोहर का कहना है कि नगर परिषद और प्रशासन समय-समय पर गोवंश पकड़ने की कार्रवाई करते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में स्थिति फिर वही हो जाती है। सड़कों पर बेसहारा पशुओं के झुड़ आ जाते हैं। सड़कों पर गोवंश का झुंड रात में अधिक दिखाई देता है। कई बार लड़ने लगते हैं और सड़क के बीच आ जाते हैं, जिससे गुजर रहे वाहन चालक घायल हो जाते हैं। इसके अलावा वाहनों को भी नुकसान पहुंचता है।
गोशाला आयोग के चेयरमैन ले चुके बैठक
नवंबर के महीने में गोशाला आयोग के चेयरमैन श्रवण गर्ग ने गौशाला संचालकों की बैठक ली थी। एक दिसंबर से गोवंशियों को सड़कों से हटाने का अभियान शुरू करवाने के आदेश दिए थे। पशुपालन विभाग के उपनिदेशक को नोडल अधिकारी बनाया गया था। बछड़े को 300, गाय को 600 व नंदी को पकड़ने पर 800 रुपये तक देने की बात हुई थी। कैथल की 22 गोशालाओं को 3 करोड़ 88 लाख रुपये जारी किए गए हैं। नंदी गोशाला में बेसहारा पशुओं को नहीं लिया जा रहा है। इससे भी पशु हटाने में दिक्कत आ रही है।
वर्जन-
समय- समय पर शहर से बेसहारा पशु पकड़े जा रहे हैं। जल्द ही सभी बेसहारा पशुओं को सड़कों से हटाया जाएगा। लोगों को परेशानी नहीं आने दी जाएगी। अभी भी अभियान जारी है। गोशाला संचालकों से भी आह्वान है कि वह पशुओं को रखें।
संदीप सोलंकी, ईओ नगरपरिषद
बॉक्स-
ये हो चुके हादसे-
21 दिसंबर को गुहला से कैथल आ रही रोडवेज की बस गांव पट्टी अफगान बेसहारा पशु आगे आने से अनियंत्रित हो गई। सड़क किनारे बने तालाब की दीवार पर चढ़ गई। चालक की सूझबूझ से बस पलटने से बच गई। 4 जनवरी को सीवन रोड पर दो सांड आपस में लड़ रहे थे। लड़ाई के बीच सीवन गेट निवासी राजेंद्र को चपेट में ले लिया। वहां उसकी बाइक क्षतिग्रस्त हो गई। जबकि उसकी टांग में काफी चोटें लगी।
- 7 जनवरी को ग्योंग अंडर पास के नजदीक बेसहारा पशु आने से ग्योंग निवासी बाइक सवार मंजीत घायल हो गया। उसके सिर में काफी चोटें लगी है। - 15 जनवरी को करनाल रोड पर शुगर मिल के नजदीक नरड़ निवासी अंकित सड़क से जा रही गाय से भिड़ गया। जहां उसके पांव व सिर में चोटें लगी।
- 18 दिसंबर को चंदाना गेट निवासी विवेक की बाइक के आगे नंदी आने से वह चोटिल हो गया। उसके हाथ में फ्रैक्चर आ गया था।
- चार दिसंबर को जींद रोड पर आईटीआई के नजदीक तितरम निवासी संदीप की गाड़ी नंदी से भीड़ गई। उसकी गाड़ी क्षतिग्रस्त हो गई। वह उसके हाथ पर काफी चोटें लगी।
जींद रोड पर बृज के नीजे इकट्ठा हुए बेसहारा गोवंश।