कैथल। खुराना रोड पर स्थित डंपिंग यार्ड में पड़े लगभग 40 हजार टन कचरे को खत्म करने के रोडमैप की शुक्रवार को नगर परिषद के अधिकारी आमजन को जानकारी देंगे। साथ ही आस-पास के गांवों के लोगों की इस डंपिंग यार्ड को लेकर यदि कोई परेशानी है तो इसकी जनसुनवाई की जाएगी। डंपिंग यार्ड पर कचरे के ढेर को खत्म करके यहां पौधरोपण किया जाना है। एनजीटी के निर्देशानुसार यह जनसुनवाई रखी गई है। इसके बाद नगर परिषद की ओर से पर्यावरण संरक्षण के संबंध में एक प्रमाण पत्र के लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय में आवेदन किया जाएगा। अगले चार माह में इस कचरे को शून्य किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
गौरतलब है कि खुराना रोड पर नगर परिषद की ओर से डंपिंग यार्ड बनाया है। इसमें लगभग एक लाख टन से अधिक कचरे का ढेर लगा हुआ था। इसमें से अब करीब 40 हजार टन कचरा बचा हुआ है। इसमें अक्सर आग लग जाती है। इस कारण आस-पास के किसानों को दिक्कतें होती हैं। इसके अलावा बदबू से भी परेशानी है। यहां नगर परिषद द्वारा एक एजेंसी के माध्यम से कचरे का निस्तारण करवाया जा रहा है।
एनजीटी के निर्देशानुसार इस जगह से कचरे को खत्म करके इस पुन: उसी स्परूप में लाना है, जिस स्वरूप में यह डंपिंग यार्ड से पहले थी। इसके लिए जो पहले से कचरा पड़ा हुआ है, उसे खत्म किया जाना है। साथ ही जो कचरा हर रोज शहर से निकलेगा, उसे उसी दिन खत्म करके रिसाईकिल किया जाएगा। उधर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कर्मचारी विकास ने बताया कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कैथल की ओर से खुराना रोड स्थित डंपिंग यार्ड में शुक्रवार को जन सुनवाई कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसकी अध्यक्षता डीसी संगीता तेतरवाल करेगी। कार्यक्रम के तहत आसपास के लोगों व पार्षदों की कचरे को लेकर समस्याएं सुनी जाएंगी। इसके अलावा लोगों को किस तरह से कचरे का निस्तारण करना है, उसके बारे में जानकारी दी जाएगी। क्षेत्रीय अधिकारी हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला परिषद अध्यक्ष कैथल, आयुक्त नगर निगम कैथल, संयुक्त निदेशक जिला उद्योग केंद्र कैथल मौजूद रहेंगे।
कचरा निस्तारण का रोडमैप तैयार
ईओ नगर परिषद कुलदीप कुमार ने बताया कि नगर परिषद द्वार कचरे की साइट पर पड़ा लगभग 40 हजार टन कचरा अगले चार माह में खत्म किया जाएगा। इसके बाद जो कचरा आएगा, उसमें से 60 प्रतिशत गीले कचरे को खाद में हर रोज बदला जाएगा। जो शेष 40 प्रतिशत कचरा होगा, उसकी बिक्री की जाएगी। इसके लिए आवश्यक योजना तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि जनसुनवाई कार्यक्रम के बाद एक रिपोर्ट बनाकर विभाग को भेजी जाएगी। एनजीटी के निर्देशानुसार इस कचरे का प्रबंधन किया जाएगा। इसके बाद एक पर्यावरण पर होने वाले प्रभाव के प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया जाएगा।