संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। गणपति बप्पा के आगमन से पहले शहर में गणेश महोत्सव की तैयारियां जोरों पर हैं। मंडपों की सजावट, पंडाल निर्माण और भव्य झांकियों की तैयारी के लिए रूपरेखा बनाई जाने लगी हैं। बाजार में भी रौनक बढ़ने लगी है। ढांड रोड पर मूर्तिकारों ने मूर्तियों का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है।
कैथल में हर साल राजस्थान से मूर्तिकार पहुंचते हैं, जो यहां मूर्तियां बनाकर बेचते हैं। इस पर्व पर करीब दो से तीन लाख रुपये का कारोबार केवल मूर्तियों से हो जाता है। हालांकि कारीगर दिवाली तक लगातार मूर्तियां बनाने का काम करते हैं।
मूर्तिकार रमेश कुमार ने बताया कि वे एक ठेकेदार के माध्यम से यह काम करते हैं। ठेकेदार हरियाणा और पंजाब में अलग-अलग स्थानों पर पंडाल लगाकर कारीगरों को नियुक्त करता है। गणेश चतुर्थी से पहले ही मूर्तियों का निर्माण शुरू कर दिया जाता है। एक मूर्ति की कीमत 200 रुपये से लेकर 20 से 30 हजार रुपये तक होती है।
इस बार गणेश चतुर्थी 27 अगस्त को है और गणेश महोत्सव सात सितंबर तक मनाया जाएगा। 10 दिनों तक पूजा-अर्चना और उत्सव के बाद प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। कैथल शहर में इस बार छोटे-बड़े करीब 150 गणपति पंडाल लगाए जाने का अनुमान है।
शहर के बाजारों में मिट्टी, पीओपी और अन्य सामग्री की प्रतिमाएं सजनी शुरू हो गई हैं। मूर्तिकारों ने गणेश प्रतिमाओं को अंतिम रूप देना भी शुरू कर दिया है।
प्राचीन श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर के पंडित मुनींद्र मिश्रा ने बताया कि इस बार मंदिर में 13वां विशाल गणपति महोत्सव सात सितंबर तक धूमधाम से मनाया जाएगा। इसके अलावा शहर में गणपति उत्सव के लिए शहर में तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए विभिन्न धार्मिक, सामाजिक संगठनों सहित कॉलोनियों, मोहल्लों के बने युवा क्लब रूपरेखा बनाने में लगे हैं। कई संगठन व क्लब गणपति उत्सव के लिए आसपास के लोगों से चंदा एकत्रित रहे हैं। जिससे पंडालों में सुबह शाम की आरती के साथ प्रसाद वितरण, चौकी, झांकियां व जागरण जैसे आयोजन हो सके।
06 कैथल। ढांड रोड पर गणेश चतुर्थी के उपलक्ष्य में रखी गई प्रतिमाएं। संवाद
06 कैथल। ढांड रोड पर गणेश चतुर्थी के उपलक्ष्य में रखी गई प्रतिमाएं। संवाद