कोरोना महामारी के इस दौर में कुछ नगर परिषद के कर्मचारी ऐसे भी हैं जो कोरोना संकट में सिपाही बनकर उभरे हैं। खुद की परवाह न कर कोरोना संक्रमण से काल का ग्रास बनें लोगों को अंतिम विदाई दे रहे हैं। साथ ही दूसरों के फर्ज को खुद बेटा बनकर निभा रहे हैं। हम बात कर रहे हैं सिविल अस्पताल के पास बने श्मशान घाट में कोरोना पॉजिटिव मृतकों के अंतिम संस्कार करने वाली टीम की। जो इस संकट के दौर में एक साल से अपने परिवार से दूर रहकर इस पुण्य के कार्य में लगे हैं। पिछले वर्ष लॉकडाउन में ही उनकी ड्यूटी लगाई गई थी। तभी से वह अपने परिवार को कुछ ही समय दे पाते हैं। इन्होंने किसी के बेटों का, किसी के भाई का फर्ज निभाया और पिछले वर्ष कोरोना पॉजिटिव मरीजों का संस्कार किया और अब फिर मौत के बढ़ते आंकड़े के साथ फिर जुट गए हैं। ये टीम पीपीई किट पहन कर अब तक 50 कोरोना पॉजिटिव मृतकों का संस्कार कर चुकी हैं। पॉजिटिव मृतकों की मृत्यु के बाद उक्त श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाता है। अंतिम संस्कार करते समय कर्मचारी खुद को सैनिटाइज करते हैं। इसके बाद पीपीई किट पहनकर अंतिम संस्कार करते हैं।