कैथल। नूंह जिले के लाहवरी गांव के आरोपियों ने खानपुर के 11 किसानों की 13.75 एकड़ जमीन का मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर फर्जी पंजीकरण कराया और 1.10 लाख रुपये हड़प लिए। मुख्यमंत्री उड़नदस्ता इकाई जींद की जांच में दो युवकों पर किसानों की जमीन पर अपने नाम दर्ज करवाने का आरोप है। इसके बाद खरीफ सीजन 2025 में इसी जमीन पर कपास और बाजरे की फसल दर्शाकर मेरा पानी मेरी विरासत योजना के तहत 1,10,050 रुपये अपने बैंक खातों में ले लिए गए। जांच में यह भी सामने आया कि खानपुर गांव में दोनों आरोपियों के नाम का कोई व्यक्ति नहीं है।
छह किसानों की जमीन पर मोहम्मद ने लिए 59,500 रुपये
जांच के अनुसार लाहवरी निवासी मोहम्मद ने खानपुर के धर्मपाल, जयभगवान, कर्मबीर, सतबीर उर्फ सुनील, जगमेल और बलबीर की कुल 7.438 एकड़ जमीन का पोर्टल पर अपने नाम पंजीकरण कराया। इस जमीन पर खरीफ सीजन 2025 में कपास की फसल दर्शाकर योजना के तहत 59,500 रुपये प्राप्त किए गए। इसी तरह यासिर ने खानपुर की गीता, पूजा, संजू, गोलो देवी और छोटी की कुल 6.319 एकड़ जमीन अपने नाम पंजीकृत करवाई। इस जमीन पर कपास और बाजरा की फसल दर्शाकर योजना के तहत 50,550 रुपये का लाभ लिया गया।
आठ अन्य लोगों के नाम भी जांच में आए
मुख्यमंत्री उड़नदस्ता की जांच में कैथल जिले में आठ अन्य लोगों के भी किसानों की जमीन ऑनलाइन पोर्टल पर अपने नाम दर्ज करवाकर योजना का अनुचित लाभ लेने की बात सामने आई। इनमें असगरी, अकबर खान, शोकिन, तसलीम, तालिब हुसैन, अरमान, दीनमोद और जसमीन शामिल हैं।
डीएसपी सुशील प्रकाश ने बताया कि मुख्यमंत्री उड़नदस्ता की शिकायत पर सीवन थाना पुलिस ने मोहम्मद, यासिर समेत सभी आरोपियों के खिलाफ धारा 318, 336, 338, 340 और 61 बीएनएस के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है। जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाए। मामले की जांच जारी है।
यह है मेरा पानी मेरी विरासत योजना-
मेरा पानी मेरी विरासत हरियाणा सरकार की योजना है। इसे धान की जगह कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने और भूजल बचाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। योजना की शुरुआत खरीफ 2020 में हुई थी। धान छोड़कर वैकल्पिक फसल लगाने पर 8,000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि का प्रावधान है।
कपास, दलहन और तिलहन जैसी फसलों पर 2,000 रुपये प्रति एकड़ अतिरिक्त बोनस दिया जा रहा है। धान न लगाकर खेत खाली छोड़ने वाले किसान भी योजना में शामिल किए गए हैं। लाभ के लिए मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण जरूरी है।