कैथल। जिले की मंडियों में पीआर धान खरीद में फर्जीवाड़े के संकेत साफ दिखने लगे हैं। खेतों में इस बार प्रति एकड़ औसतन 10-15 क्विंटल कम झाड़ निकल रही है, फिर भी मंडियों में आवक गत वर्ष से अधिक हो चुकी है। यह विरोधाभास खुद संदेह को जन्म दे रहा है।
आंकड़े बताते हैं कि इस वर्ष 29 अक्तूबर तक जिले की मंडियों में 8,80,684 मीट्रिक टन (एमटी) धान की आवक हो चुकी है, जबकि गत वर्ष इसी अवधि तक 7,87,950 एमटी आवक हुई थी। यानी 92,734 एमटी अधिक आवक वह भी उस वर्ष जब उत्पादन घटा है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (डीएफएससी) ने सभी मंडी सचिवों को पत्र जारी कर जिम्मेदारी तय करने की कोशिश की है। पत्र में कहा गया है कि कृषि विभाग के अनुमान के अनुसार इस बार उपज कम हुई है, बावजूद इसके आवक अधिक है, जो संदिग्ध है। सभी सचिव अपनी मंडियों में निगरानी रखें, आवक की वीडियोग्राफी कराएं, और बाहरी राज्यों से धान न आने दें।
आवक बढ़ी, उपज घटी, संदेह गहराया ः धान की पैदावार में कमी और मंडी में बढ़ती आवक के बीच गड़बड़ी की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। कृषि विभाग ने पहले ही अनुमान जताया था कि इस बार बारिश के असर से उपज कम निकलेगी, परंतु मंडियों में पिछले साल से कहीं अधिक धान की आमद दर्ज हुई है। इससे साफ है कि या तो बाहर के राज्यों से धान लाकर बेचा जा रहा है, या रिकॉर्ड में हेराफेरी की जा रही है।
जिम्मेदारी टालने की कोशिश ः डीएफएससी के पत्र में कहा गया है कि कृषि विभाग के अनुसार ग्रेड-ए धान की उपज घट गई है, परंतु 23 अक्तूबर तक 88 हजार एमटी अधिक आवक दर्ज होना चिंताजनक है। सचिव निगरानी बढ़ाएं, वीडियोग्राफी कराएं, और दूसरे राज्यों से आवक पर रोक लगाएं। इस पत्र से विभाग ने संदेह का ठीकरा मंडी सचिवों के सिर फोड़ दिया है। जबकि खरीद प्रक्रिया में मंडी सचिवों के साथ-साथ खरीद एजेंसियों की भूमिका भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। मंडी में धान की एंट्री मार्केट कमेटी द्वारा दिए गए गेट पास से होती है, जबकि निकासी और अलॉटमेंट एजेंसी के माध्यम से। ऐसे में अकेले सचिव जिम्मेदार नहीं ठहराए जा सकते। संवाद
मिलीभगत से हो रहा घोटाला : विक्रम कसाना
भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के युवा प्रदेशाध्यक्ष विक्रम कसाना ने आरोप लगाया है कि पूरा तंत्र मिलीभगत से धान खरीद में फर्जीवाड़ा कर रहा है। इस बार प्रति एकड़ 10–15 क्विंटल झाड़ (पैदावार) कम है, फिर भी मंडियों में रिकॉर्डतोड़ आवक दिखाई जा रही है। बाहर के राज्यों से ट्रक भर-भरकर धान लाया जा रहा है और सरकारी खरीद में मिलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाकियू कई मामले पकड़कर अधिकारियों को सौंप चुकी है। सरकार को निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
सचिवों को निर्देश दिए गए हैं कि अगर कोई किसान साथ लगते जिलों जैसे जींद, करनाल या कुरुक्षेत्र से धान लेकर आ रहा है, तो पहले स्थानीय किसानों की खरीद को प्राथमिकता दें। प्रत्येक किसान का पूरा रिकॉर्ड मेंटेन किया जाए। कृषि विभाग को भी पत्र लिखा गया है कि वह यह स्पष्ट करे कि इस बार पीआर धान की रोपाई गत वर्ष से कितनी अधिक हुई है। जिले में छह जगह नाके लगाए गए हैं ताकि बाहर के धान का प्रवेश नहीं हो। -निशांत राठी, डीएफएससी
बोल रहे हैं आंकड़े
मंडी
गत वर्ष
वर्तमान वर्ष
(एमटी)
(एमटी)
कैथल
1,79,833
2,01,271
चीका
3,32,692
3,49,782
ढांड
1,35,758
1,66,294
पूंडरी
73,890
94,880
सीवन
26,033
24,107
कलायत
14,881
17,173
पाई
12,045
12,470
राजौंद
12,818
14,707
नोट: आंकड़े 29 अक्तूबर तक के, मीट्रिक टन में।