कैथल। हत्या व एससी एसटी एक्ट मामले में चार दोषियों को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. गगनदीप कौर सिंह ने सात-सात साल के कारावास और 20 हजार 500 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर सभी को 130 दिन की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
इस बारे में कश्मीर सिंह निवासी चीका ने तीन फरवरी 2017 को थाना गुहला में आईपीसी की धारा 148, 149, 302, 341 और एससीएसटी एक्ट की धारा 3(2)वीए के तहत केस दर्ज करवाया था। इस मामले में दो आरोपी विक्रम उर्फ विक्की व विक्रमजीत उर्फ बिट्टू बरी कर दिए हैं। पुलिस ने तफ्तीश के दौरान नामजद आरोपी चांदी सरपंच, भीम, बिंदर, हरदीप, प्रेमा, रमेश कुलविन्द्र, प्रदीप, संदीप व राजू को निर्दोष मानते हुए उनका चालान नहींं किया था।
केस के हवाले से सरकारी वकील जेबी गोयल ने बताया कि कश्मीर सिहं निवासी चीका सतीश कुमार ठेकेदार के पास नौकरी करता था। वर्ष 2015-16 में शराब के ठेकेदारों के पास काम करने के कारण चांदी ग्रुप के साथ आपस में रंजिश के चलते दोनों पार्टियों के आपस में झगड़े होते थे। तीन फरवरी 2017 को कश्मीर व उसका भतीजा सिकंदर अपनी मोटरसाइकिल पर सीवन जा रहे थे। उनके पीछे भीम, संजीव वासी चीका भी आ रहे थे। जब वे गांव थेह मुकेरियां के पास पहुंचे तो उनके पीछे से दो गाड़ियां आई और मोटरसाइकिल के आगे लगा दी। इस पर सिकंदर ने अपनी मोटरसाइकिल रोक दी।
सरपंच चांदी वासी खुशहाल माजरा व उसके साथियों ने गाड़ी से उतरते जातिसूचक शब्द कहे कि आज बच कर नहीं जाने चाहिये। दोनों गाडिय़ों में से चांदी के साथी भीम वासी चीका, बिंदर वासी नंदगढ़, सुखदेव वासी, हरदीप वासी बदसुई, राजू कौशिक वासी चीका, प्रेमा वासी नन्दगढ़, रमेश उर्फ मेसी ठेकेदार वासी पीडल, कुलविंद्र उर्फ वासी सलेमपुर, गुरजेंट उर्फ बांडु वासी चीका, प्रदीप उर्फ कच्छु वासी चीका, संदीप व अन्य तीन-चार अज्ञात अपने हाथों में लकड़ी के बिंडे लिए गाड़ियों से उतरे।
चांदी राम का ईशारा पाते ही सभी ने सिकंदर को मारना शुरु कर दिया। मौके पर काफी लोग इकट्ठे हो गए, जिनको देख कर हमलावर मौके से चले गए और जाते समय जान से मारने की धमकी दे गए। थोड़ी ही देर में सुरेंद्र निवासी अपनी गाड़ी
लेकर मौके पर पहुंचा गया। घायल सिकंदर को ईलाज के सीएचसी गुहला
ले कर आए। जहां से डॉ. ने उसका प्राथमिक उपचार करने के बाद जीएच कैथल रेफर कर दिया।
कैथल में डाक्टर ने उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया लेकिन परिजन उसे एक निजी अस्पताल कैथल ले आऐ। वहां आते ही इलाज के दौरान सिकंदर ने दम तोड़ गया। इस बारे में पुलिस ने केस दर्ज करके आरोपियों का गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने चालान तैयार करके अदालत के सुपुर्द किया।
एडीजे डॉ. गगनदीप कौर ने दोनों पक्षों को गौर से सुनने के बाद गुरजंट उर्फ बाण्डु, सुखदेव उर्फ सुखा, कर्मजीत उर्फ कमली और प्रवीण उर्फ बिन्नी को दोषी करार दिया। मामले में कुल 15 गवाह पेश किए। अपने 63 पेज के फैसले में न्यायाधीश ने सभी दोषियों को सात-सात साल की कैद और प्रत्येक को 20 हजार 500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।