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करीब चार घंटे तक जींद-कैथल मार्ग पर जाम लगाकर बैठे रहे किसान

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former - फोटो : Kaithal
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सरकार द्वारा खेती को लेकर जारी तीन कानूनों के विरोध में भारतीय किसान यूनियन से जुड़े किसान ने तितरम मोड़ पर इकट्ठे होकर प्रदर्शन किया। जींद-कैथल मार्ग पर ओवरब्रिज के नीचे ट्रैक्टर खड़े करके जाम लगा दिया। करीब चार घंटे तक लगातार जाम के दौरान किसानों ने सरकार व प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जिलेभर से सैकड़ों की संख्या में किसान मौके पर पहुंचे।
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प्रदर्शन की अध्यक्षता भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान होशियार गिल प्यौदा ने की। प्रधान ने बताया कि किसानों ने यह जाम पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत लगाया है। किसान शुरू से ही कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। जब तक सरकार इन तीनों काले कानूनों को वापस नहीं लेती तब तक किसानों का संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इन कानूनों के कारण फसल का ठेका लेने वाली कंपनियां किसानों पर हावी होंगी। उन्हें फसल के रेट भी लागत के अनुसार पूरे नहीं मिलेंगे।
सीजन के चलते नहीं पहुंच सके ज्यादा किसान- ज्यादा किसान प्रदर्शन में शामिल नहीं होने के सवाल पर जिला प्रधान ने कहा कि इस समय धान का सीजन चल रहा है। अपने कार्यों में व्यस्त होने के कारण ज्यादा संख्या में किसान प्रदर्शन में शामिल नहीं हो पाए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार जल्द से कानूनों को वापस नहीं लेती है तो आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
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किसानों के ट्रैक्टर रोकने पर जताया रोष- किसान नेता सुरेश कौथ ने कहा कि यह किसानों का राष्ट्रीय आंदोलन है। वे शांतिपूर्ण तरीके से हाईवे पर बैठे हैं। जिला प्रशासन द्वारा कुछ किसानों को प्रदर्शन स्थल पर आने से पहले ही रोक लिया गया, जो सही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अगर जल्द ही उन्हें प्रदर्शन स्थल पर आने के लिए रास्ता नहीं खोला गया तो वे किसी भी प्रकार के संघर्ष से पीछे नहीं हटेंगे। इस अवसर पर किसान रामफल, राजाराम, संदीप सिंह, किसान नेत्री प्रोमिला सहारण, दरबारा, राजेंद्र सिंह व अन्य किसान मौजूद थे।
जाम के दौरान जिला प्रशासन की तरफ से पहुंचे नायब तहसीलदार ईश्वर सिंह ने बताया कि किसानों ने केवल ब्रिज के नीचे से रास्ता बंद कर रखा था। वाहन चालकों को ब्रिज के शुरूआती और अंतिम प्वाइंट से घुमाकर निकाला गया। किसी भी वाहन चालक को परेशानी नहीं हुई। किसानों ने एंबुलेंस व अपात कालीन वाहनों के लिए रास्ता छोड़ दिया था।
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