जानकारी देते हरियाणा सरस्वती हेरिटेज बोर्ड के अध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमच
कैथल। स्योंसर जंगल में 5 करोड़ रुपये की लागत से 8-9 किलोमीटर क्षेत्र में सरस्वती नदी के हिस्से को पुनर्जीवित किया जा रहा है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ वन्य जीवों को भी पानी उपलब्ध होगा।
पहले जहां सरस्वती नदी में सीमित दूरी तक ही पानी बहता था, वहीं अब विभिन्न सहायक नदियों के माध्यम से इसका प्रवाह बिलासपुर से लेकर सिरसा (ओटू हेड) तक करीब 400 किलोमीटर तक पहुंच चुका है। ये जानकारी हरियाणा सरस्वती हेरिटेज बोर्ड के अध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमच ने दी।
उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के ‘नदी जोड़ो’ अभियान को साकार करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार चौतांग, टांगरी, मारकंडा और घग्गर जैसी नदियों को सरस्वती से जोड़ने की दिशा में कार्य कर रही है।
साथ ही पारा नदी के पानी को भी सरस्वती में लाने की योजना पर काम शुरू हो चुका है। चेयरमैन ने कहा कि इन सभी परियोजनाओं का उद्देश्य न केवल सरस्वती नदी के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को पुनर्स्थापित करना है, बल्कि किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना और भूजल स्तर को सुधारना भी है। इस अवसर पर कार्यकारी अभियंता दिग्विजय सिंह मौजूद रहे। संवाद