संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। खेड़ी शेरखां गांव मेंं बिजली स्टेशन के नजदीक मुख्य मार्ग पर स्थित पशु तालाब में भारी तादाद में मछलियों के मरने से ग्रामीणों का जीना मुहाल हो गया है।
तालाब से लेकर पूरे गांव में दुर्गंध का आलम है। इसके तट के नजदीक शहीद स्मारक, सामान्य बस अड्डा, बिजली घर, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, मंदिर और अन्य सार्वजनिक स्थल हैं। बावजूद इसके पंचायती राज विभाग तालाब की सुध नहीं ले रहा।
इसके चलते पानी में मृत मछलियों की परत बन गई है। पशु धन पानी की एक-एक बूंद को तरस गया है। हालात इस कदर खराब हैं कि इस पानी को पशुओं को पिलाना तो दूर की बात नहलाना भी बीमारी को न्यौता देने वाली बात है, लेकिन इसके अलावा ग्रामीणों के पास कोई अन्य विकल्प भी नहीं है। पशु पालक रामू, रमेश, मनवीर व लीला का कहना है कि ग्रामीणों का मुख्य व्यवसाय कृषि व पशु पालन है।
केंद्र एवं राज्य सरकार ने इन दोनों व्यवसायों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न नीतियां बनाई हैं। खेड़ी शेरखां गांव मेंं पशु पालकों को बेहतर सुविधाएं मिलना तो दूर की बात तालाब का साफ पानी भी उपलब्ध नहीं हो रहा। तालाब में ताजा पानी के भराव व गंदे पानी की निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। पशु तालाब की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों में भारी गुस्सा है। उनका कहना है कि यदि त्वरित तौर सेे तालाब की सफाई करते हुए स्वच्छ जल भराव नहीं किया गया तो वे उप मंडल स्तर पर पशु धन के साथ विरोध प्रदर्शन करेंगे।
महिला सरपंच सरोज बाला ने बताया कि मौखिक तौर सेे प्रशासन को स्थिति से अवगत करवाया गया है। तालाब मेंं स्वच्छ जल भराव और गंदे पानी की निकासी के लिए स्पेशल योजना तैयार करने की मांग है, ताकि पशुधन को पीने का पानी उपलब्ध होने के साथ-साथ वाटर रिचार्ज व्यवस्था मजबूत हो। इसके साथ ही तालाब में मछलियों के मरने से फैली गंदगी को साफ करने के लिए विशेष अभियान चलाने की मांग है।