कैथल। फायर फायटिंग के लिए लघु सचिवालय को तैयार किया जा रहा है। इसे जल्द ही सुरक्षा कवच मिल जायेगा। इसके लिए जोरशोर से कार्य शुरू हो गया है। इससे पहले अमर उजाला ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। साथ ही सुरक्षा अनदेखी की खामियों को उजागर किया था। इसके बाद आग से बचाव के लिए प्रोजेक्ट बनाया गया। अब पूरे लघु सचिवालय को 350 मीटर लंबाई के मोटे पानी के पाइप से सुरक्षा कवच देते हुए नेशनल बिल्डिंग कोड के अनुसार आग से सुरक्षित करने का कार्य शुरू कर दिया गया है।
अमर उजाला की ओर से पिछले दो-तीन सालों में कई बार लघु सचिवालय में फायर फाइटिंग सिस्टम की खामियों को उजागर किया गया, जिसमें बताया गया कि लघु सचिवालय के आग के सिलेंडरों की गैस खत्म हो चुकी है। आग से बचाव के लिए यहां पानी का टैंक भी उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा भी कई खामियों की ओर प्रशासन का ध्यान दिलवाया गया। इसके बाद इसके लिए कार्ययोजना तैयार की गयी। जनस्वास्थ्य विभाग के एसडीओ प्रदीप कुमार ने बताया कि 22 लाख रुपये की लागत से लघु सचिवालय को फायर फायटिंग के लिए तैयार किया जा रहा है। इसके तहत पूरे सचिवालय में ग्राउंड फ्लोर सहित दोनों मंजिलों व छत पर मोटे लोहे का 350 मीटर लंबा पाइप लगाया गया है। वहीं दोनों ओर 30 मीटर लंबाई वाला पानी का पाइप लगाया गया है। साथ ही यहां अलार्म भी लगाए जाएंगे। इसके अलावा एक लाख लीटर पानी का अंडरग्राउंड वाटर टैंक बनाया जाएगा, जिससे आपात स्थिति में 200 मीटर दूर तक पानी का छिड़काव किया जा सके। इस तरह से पूरा लघु सचिवालय पाइपों के माध्यम से पानी के सुरक्षा कवच में होगा। यह पूरा प्रोजेक्ट नेशनल बिल्डिंग कोड के अनुसार बनाया गया है, जिसमें आगजनी संबंधी सभी तरह के नियमों का पालन किया जाएगा। इस संबंध में आपदा प्रबंधन अधिकारी शब्द दयाल ने भी कहा कि अमर उजाला की खबर के बाद इस संबंध में प्रोजेक्ट बनाया गया था। इसके बाद यह मंजूर हुआ और अब यहां काम किया जा रहा है।
जिले भर का रिकार्ड और महत्वपूर्ण दस्तावेज है लघु सचिवालय में :-पूरे जिले का महत्वपूर्ण रिकॉर्ड सहित जिले के विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यालय लघु सचिवालय में हैं। इस कारण यहां आग का सिस्टम दुरुस्त होना जरूरी था। इससे पूर्व महज आग बुझाने के सिलेंडर लगे थे। वो भी शोपीस बने हुए थे और उनमें कई-कई सालों तक गैस की जांच तक नहीं होती थी।