वायु को प्रदूषित करने में 25 प्रतिशत प्रभाव पटाखों का रहता है। एक दिन में फैले कुल प्रदूषण में 25 प्रतिशत नुकसानदायक कण पटाखों से उत्सर्जित होते हैं। इसके अलावा धूल, धुआं और अन्य कई प्रकार के कारक भी पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी लोगों को इस बार दीवाली पर पटाखे नहीं जलाने की सलाह दे रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि पटाखों में इस्तेमाल किए जाने वाले मैटीरियल में कई प्रकार की जहरीली गैसें निकलती हैं। आंखों के साथ-साथ सांस और अन्य प्रकार से मानव स्वास्थ्य पर ये गैसें विपरित प्रभाव डालती हैं।
ये गैसें निकलती हैं पटाखे जलाने से- पटाखे जलाने से सल्फर डाई ऑक्साइड, कार्बन डाई ऑक्साइड व कार्बन मोनोऑक्साइड सहित कई प्रकार की गैसें पैदा होती हैं। इसके अलावा पटाखे फूटने के बाद सड़कों पर भी कूड़ा कचरा फैल जाता है। कई-कई दिनों तक भी पटाखों के कारण हुए नुकसान की रिकवरी नहीं हो पाती है।
अधिकतम 410 तक पहुंचा जिले का एयर क्वालिटी इंडेक्स- जिले में सोमवार शाम को एक्यूआई अधिकतम 410 तक रहा और न्यूनतम 12 दर्ज किया गया। वहीं औसतन एक्यूआई 332 तक रहा। दिन भर जिले में एक्यूआई की स्थिति इसी प्रकार से बनी रही।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ विकास हुड्डा ने बताया कि दिवाली के आसपास अक्सर स्मॉग और अन्य तरीकों से प्रदूषण बढ़ जाता है। पटाखों के कारण इन दिनों में 25 प्रतिशत तक पर्यावरण प्रदूषित होता है। उन्होंने जिलावासियों से अपील की कि इस बार दिवाली पर पटाखों का प्रयोग न करें। दीप जलाकर और एक दूसरे को मिठाइयां बांटकर ही दिवाली मनाएं। इससे प्रदूषण भी नहीं होगा और पर्व की रौनक भी बनी रहेगी।