फोटो 11- गांव गुहणा में मक्का की बिजाई करते किसान।
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कैथल। पिछले वर्ष गुलाबी सुंडी कीट के प्रकोप से कपास की फसल प्रभावित होने पर इस बार किसानों का इस फसल से मोह भंग होता दिख रहा है। कपास की बिजाई का आधे से ज्यादा समय गुजर चुका है और अब तक जिले में पिछले वर्ष की तुलना में 50 प्रतिशत भी बिजाई नहीं हुई। बिजाई का आंकड़ा चार हजार हेक्टेयर तक भी नहीं पहुंचा। पिछले वर्ष की तुलना में कपास का क्षेत्रफल काफी कम रहने की संभावना है।
विदित रहे कि कपास के रकबे में कमी आने की वजह पिछले वर्ष गुलाबी सुंडी का प्रकोप माना जा रहा है। वहीं इस वर्ष बाजरा और मक्का के रकबे में काफी वृद्धि होने की उम्मीद है क्योंकि इस बार तूड़ी की काफी कमी महसूस की गई। अब किसान मक्का व बाजरा से चारे की मांग और खपत पूरी करने पर ध्यान दे सकते हैं।