संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। सहकारी चीनी मिल कैथल के प्रबंधक कृष्ण कुमार ने किसानों से शरदकालीन गन्ना बिजाई के दौरान एक-एकड़ में प्राकृतिक खेती और अन्तवर्ती फसल अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती रासायनिक खाद और कीटनाशकों के दुष्प्रभावों से बचाव करती है और भूमि की मृदा शक्ति व जल संरक्षण में मददगार साबित होती है।
कृष्ण कुमार ने नैना, क्योड़क और बुढ़ाखेड़ा गांव में आयोजित किसान संगोष्ठियों में किसानों को बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाने से कृषि योग्य भूमि व इंसान के स्वास्थ्य की रक्षा होती है। उन्होंने जीरो बजट प्राकृतिक खेती के लिए हरियाणा सरकार के पोर्टल पर पंजीकरण कर सरकारी सहायता प्राप्त करने की जानकारी भी दी।
उन्होंने किसानों को बताया कि शरदकालीन गन्ना अन्तवर्ती फसलों के साथ उगाकर नई तकनीक अपनाने से अतिरिक्त आमदनी हासिल की जा सकती है और लागत में भी कमी आ सकती है। गन्ना की सिंगल बड विधि से चार फीट दूरी पर बिजाई करने पर प्रति एकड़ 25-30 क्विंटल बीज की बचत होती है और गन्ने का जमाव दोगुना तक बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने हरियाणा के जीरो बजट प्राकृतिक खेती को अधिक से अधिक बढ़ावा देने के लिए हरियाणा सरकार द्वारा पोर्टल खोला गया है। प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को इस पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन करवाना होगा ताकि किसान सरकारी मदद प्राप्त कर सके। पंजीकृत किसानों को प्रशिक्षित व प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने सभी किसानों से गन्ने की खेती अपनाने की अपील की। इस अवसर पर गन्ना
प्रबंधक डॉ. रामपाल ने शरदकालीन गन्ना बिजाई पर मिल द्वारा दिए जाने वाले अनुदानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। संगोष्ठियों में किसानों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।