फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kaithal News: बरसाती मोगा नहीं मिलने पर सिंचाई विभाग के दफ्तर पहुंचे किसान

विज्ञापन
सिंचाई विभाग के अ​धिकारी को खरी खोटी सुनाते हुए किसान। संवाद
विज्ञापन
कैथल। बरसाती मोगा नहीं मिलने से परेशान कई गांव के किसान सिंचाई विभाग के दफ्तर पहुंचे और अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। अधीक्षण अभियंता नीरज शर्मा किसानों को दफ्तर में नहीं मिले लेकिन पूंडरी क्षेत्र के कार्यकारी अभियंता निशांत बत्तान और कैथल क्षेत्र के गुरविंद्र सिंह देयोल किसानों की समस्या सुनने के लिए पहुंचे।
विज्ञापन

किसानों ने मौके पर पहुंचे अधिकारियों को चेतावनी देते हुए स्पष्ट कहा कि अगर शुक्रवार तक मोगे खोलने की अनुमति नहीं दी तो वे खुद मोगे खोल देंगे। गांव बात्ता, कैलरम, दुमाड़ा, तितरम, बालू व खरक पांडवा सहित कई गांवों के किसानों का कहना था कि पहले 25 जुलाई तक बरसाती मोगे खोलने की अनुमति देने की बात कही थी लेकिन विभाग ने कई दिन बीत जाने के बाद भी मोगे नहीं खोले। उन्होंने कहा कि खेतों में धान सूख रहा है और नहरों में पानी भी मौजूद है लेकिन उनके बरसाती मोगे नहीं खोले जा रहे हैं।
बरसात नहीं होने से वे पहले ही परेशान हैं और खेतों में धान ही सूख गया तो फिर वे बरसाती मोगे का क्या करेंगे। दूसरा मुद्दा बरसाती मोगे के साइज से जुड़ा है। किसानों का कहना है कि विभाग ने अपनी मर्जी से फीस रुपये जमा करवाने के बाद साइज कम कर दिए, जबकि पानी की पहले से भी ज्यादा जरूरत है। वहीं मौके पर पहुंचे कार्यकारी अभियंता गुरविंद्र सिंह देयोल का कहना है कि किसानों की समस्या गंभीर है। किसानों की समस्या मुख्याल्य को भेज दी गई है और मोगे खोलने की अनुमति मांगी है। उम्मीद है कि एक दिन के अंदर अनुमति मिल जाए।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि बरसात नहीं होने के कारण नहरों में जो अतिरिक्त पानी मिलता था, वो नहीं मिल रहा है और नियमानुसार टेल तक पानी भी पहुंचाना है। वहीं साइज घटाने के लिए उन्होंने कहा कि सरकार की पॉलिसी है कि जितने भी आवेदन राइस सूट के लिए आते हैं, उन सभी को देना है, जबकि पानी बढ़ा नहीं है तो ऐसे में सभी को पानी देने के लिए नियमानुसार ही साइज घटाए गए हैं। हालांकि अधिकारियों के समझाने के बाद और मुख्यालय शिकायत भेजे जाने के बावजूद किसान चेतावनी देकर गए हैं कि शुक्रवार तक बरसाती मोगे नहीं खोले गए तो वे खुद इनको खोल लेंगे या फिर रोड जाम करने को मजबूर होंगे।

सिंचाई विभाग के अधिकारी को खरी खोटी सुनाते हुए किसान। संवाद

सिंचाई विभाग के अधिकारी को खरी खोटी सुनाते हुए किसान। संवाद

सिंचाई विभाग के अधिकारी को खरी खोटी सुनाते हुए किसान। संवाद

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें