संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। गुहला में टटियाना बार्डर पर दूसरे दिन भी किसान जत्थेबंदी नहीं पहुंची। इसके चलते बुधवार को भी बॉर्डर पर शांति का माहौल रहा। वहीं, सुबह के समय पंजाब की तरफ से कुछ किसान हाथों में किसान संगठनों के झंडे लेकर बॉर्डर तक आए, लेकिन वे पंजाब की सीमा के अंदर ही रहे। जबकि उन्हें हरियाणा में प्रवेश नहीं करने दिया। इसके बाद वे पंजाब की सीमा में पटियाला रोड पर कुछ देर धरना देने के बाद वापस ही लौट गए। दूसरे दिन भी आईटीबीपी व हरियाणा पुलिस के जवानों का कड़ा पहरा रहा। प्रशासन ने घग्गर नदी के पुल के ऊपर कंटेनर रखकर उनमें मिट्टी भरकर व सीमेंट के बड़े बड़े ब्लाकों से रास्ते को पूरी तरह से बंद किया गया है। कंटेनरों के ऊपर खड़े होकर पुलिस व आईटीबीपी के जवान दिन रात सख्त पहरा दे रहे है। इस दौरान डीएसपी रविंद्र तोमर, डीएसपी गुहला कुलदीप सिंह, एसडीएम कृष्ण कुमार, नायब तहसीलदार सुनील कुमार दिनभर टटियाना बार्डर पर डटे रहे।
बता दें कि टटियाना बार्डर कैथल पटियाला स्टेट हाइवे पर स्थित है और जिला कैथल को पंजाब से जोडऩे वाला यह मुख्य मार्ग है। इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही बंद होने से रोज अपने काम धंधों से एक दूसरे प्रदेश में जाने वाले लोगों को भारी दिक्कतें आ रही है। जिले के दूसरे बड़े बार्डर संगतपुरा पर भी बुधवार को शांति बनी रही। बॉर्डर पर तैनात हरियाणा के डीसीपी रविंद्र तोमर का कहना है कि बॉर्डर सील करना मजबूरी है, क्योंकि किसानों को दिल्ली जाने से रोकना है ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे।
टटियाना बॉर्डर पर पंजाब कि सीमा में डटे आधा दर्जन किसान ः किसान क्रांतिकारी मोर्चा से जुड़े पंजाब के सदस्य प्रगट सिंह, स. जिंद्र सिंह, रजवंत सिंह, रौनक सिंह, सिमरजीत सिंह ने कहा कि केंद्र ने एक भी मांग नहीं मानी है। जब तक मुद्दे हल नहीं होंगे, आंदोलन चलता रहेगा। कहा कि हर हाल में दिल्ली तक जाएंगे। सरकारों को इस मसले का हल निकालना चाहिए। हरियाणा सरकार की तरफ से किसानों पर आंसू गैस के गोले और रबर की गोलियां दागना लोकतांत्रित ढांचे के विरुद्ध है। कहा पंजाब और हरियाणा के लोगों पर अत्याचार हो रहा है। ऐसा लगता है कि ये दोनों राज्य अब भारत का हिस्सा नहीं हैं, इन्हें अंतरराष्ट्रीय सीमा माना जा रहा है। कहा कि उनकी जत्थेबंदी के सीनियर नेताओं की बैठकर हो रही हैं, बैठक में जो भी फैसला होगा वह मान्य होगा।