संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। कुदरत की मार के आगे हर कोई असहाय है, लेकिन मंडी के जिम्मेदार अधिकारियों की मार से अन्नदाता खुद को नहीं बचा पा रहा। अनाज मंडियों में किसानों की फसल सुरक्षा के लिए बनाए गए शेड व्यापारियों के कब्जे में हैं, जबकि किसानों की सरसों खुले आसमान के नीचे पड़ी है। लगभग सभी मंडियों की स्थिति यही बनी हुई है।
गत सप्ताह हुई बारिश में मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारियों की लापरवाही के चलते खुले में पड़ी सरसों भीग गई थी, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इसके बावजूद मंडी प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया। वर्तमान में भी किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं, क्योंकि मौसम विभाग ने फिर से बारिश की संभावना जताई है और आसमान में बादल छाए हुए हैं।
इसके विपरीत, मार्केट कमेटी प्रशासन की व्यापारियों के प्रति नरमी और किसानों के प्रति बेरुखी साफ नजर आ रही है, जो अन्नदाता को आर्थिक नुकसान की ओर धकेल रही है। हैरत की बात यह है कि बारिश के पूर्वानुमान के बावजूद भी फसल संरक्षण के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए।
व्यापारियों द्वारा खरीदा गया धान शेडों के नीचे सुरक्षित रखा गया है, जबकि किसानों की उपज खुले में पड़ी है। किसानों को हर प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे अब कागजों तक ही सीमित रह गए हैं।
मंडी प्रशासन ने थामा व्यापारियों का हाथ : मंडियों में किसानों की फसल की अनदेखी कोई नई बात नहीं है। इसके पीछे अक्सर मार्केट कमेटी प्रशासन की लापरवाही सामने आती रही है। किसानों की सुविधा के लिए बनाए गए शेडों का उद्देश्य बारिश के दौरान फसल को सुरक्षित रखना था, लेकिन वर्तमान स्थिति इसके विपरीत है।
अब तक भी व्यापारियों द्वारा खरीदे गए धान का स्टॉक शेडों के नीचे रखा गया है। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के युवा प्रदेशाध्यक्ष विक्रम का कहना है कि मंडी प्रशासन किसानों के बजाय व्यापारियों के हित में काम कर रहा है। उनका आरोप है कि बारिश की संभावना के बावजूद किसानों के लिए शेड खाली नहीं करवाए गए, जो अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।
अभी सीजन शुरू नहीं हुआ है। सीजन से पहले ही शेड खाली करवा दिए जाएंगे। आढ़तियों को एक अप्रैल से पहले शेड के नीचे से अपना स्टॉक उठाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। -नरेंद्र ढुल, सचिव, मार्केट कमेटी कैथल