संवाद न्यूज एजेंसी
ढांड। भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के युवा प्रदेशाध्यक्ष विक्रम कसाना एडवोकेट ने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी नीतियों के कारण किसानों को घाटा हो रहा है।
बस स्टैंड स्थित भाकियू कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी खरीद ना होने के कारण किसानों को औने-पौने दामों पर सरसों बेचने पर मजबूर होना पड़ रहा है। न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम भाव पर सरसों की बिक्री होने से किसानों को घाटा हो रहा है। सरकार ने 26 मार्च से खरीद की घोषणा की है, लेकिन प्रदेश की मंडियों में पिछले कई दिनों से सरसों की आवक जारी है।
उन्होंने कहा कि जिस उम्मीद के साथ किसानों ने पिछली बार की तरह इस बार भी सरसों की फसल का रुख किया था,उसके अनुसार किसानों को सरसों की फसल के दाम नही मिल पा रहे है। कहा कि दो साल पहले जिस प्रकार सरसों महंगे दामों पर बिकी थी। इस बार भी वही दाम मिलेगा, लेकिन इस बार दामो में गिरावट से किसानों को निराशा हाथ लगी है तो वही खेतों में सरसों की फसल का उत्पादन भी औसत से कम हो रहा है।
प्रदेश की मंडियों में 4500 से 4800 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से सरसों की खरीद हो रही है जबकि सरकार ने सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5650 रुपये प्रति क्विंटल तय कर रखा है। सरकारी खरीद शुरू नहीं होने के कारण किसानों को 800 से 1000 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) सरकार से मांग करती है कि जल्द से जल्द पूरे प्रदेश की मंडियों में सरसों की सरकारी खरीद तुरंत शुरू करवाई जाए और किसानों को लूटने से बचाया जाए। भाकियू (चढूनी) सरकार व प्रशासन से मांग करती है कि ढांड, पूंडरी व कौल में अदानी साइलों के साथ साथ इन मंडियों में भी बारदाना उपलब्ध करवाए नहीं तो हमें कठोर कदम उठाने पडे़ंगे।