संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। शहर में वीरवार रात आई आंधी और बारिश के बाद अनाज मंडी में गेहूं की बोरियां भीग गई। मंडी में एक से दो फीट तक जलभराव हो गया। इससे गेहूं की बोरियां भीग गयी और खुले में पड़े गेंहू को भी नुकसान पहुंचा है। शुक्रवार सुबह मजदूर गेहूं की भीगी बोरियों के रैक बनाने में जुटे रहे।
अनाज मंडियों में गेहूं की आवक कम होने पर भी उठान की समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। जिले भर की अनाज मंडियों में गेहूं के कट्टों के अंबार लगे पड़े हैं। ऐसे में आढ़तियों को अपनी दुकानों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। इतना ही नहीं किसानों को अपनी गेहूं को उतारने के लिए भी मंडियों में जगह नहीं मिल पा रही है।
पिछले करीब 15 दिनों से आढ़ती उठान सही ना होने का रोना रो रहे हैं, इसके बावजूद अधिकारी इस समस्या का समाधान नहीं कर पाए हैं। अब करीबन गेहूं की कटाई का काम पूरा हो चुका है। इक्का-दुक्का किसानों की पछेती किस्म की गेहूं की कटाई ही अब बकाया रह गई है। गेहूं कटाई का काम संपन्न होने के चलते मंडियों में आवक भी कम होने लगी है। किसान कमल ने कहा कि वह वीरवार को अनाज मंडी में गेहूं लेकर पहुंचा था, लेकिन अभी तक भी मंडी में पहले से खरीदी गई गेहूं के कट्टे उठ नहीं पाए हैं।
बारिश के बाद स्थिति हुई बदहाल
वीरवार रात को हुई बारिश होने के कारण गेहूं भीगा हुआ है। इससे न केवल उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, बल्कि किसानों को आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ सकता है। किसानों का कहना है कि मंडियों में गेहूं को ढकने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। उठान की धीमी गति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सवाल उठ रहे हैं।
किसान संगठनों ने प्रशासन से तत्काल उठान प्रक्रिया तेज करने और गेहूं को सुरक्षित करने के लिए उचित कदम उठाने की मांग की है। जिला प्रशासन ने दावा किया है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और जल्द ही उठान प्रक्रिया को गति दी जाएगी। हालांकि मौसम की अनिश्चितता के बीच किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है।