जिला नागरिक अस्पताल में बने कोरोना आइसोलेशन वार्ड में दाखिल संक्रमित मरीजों के परिजनों ने बुधवार को जिला अस्पताल में हंगामा किया। परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन न तो उन्हें अपने मरीज के साथ अटेंडेंट के तौर पर वार्ड में जाने दिया और न ही अस्पताल की ओर से किसी अटेंडेंट को मरीजों की देखभाल के लिए लगाया है। यहां तक कि नर्स और डॉक्टर भी वार्ड में सही ढंग से मरीजों की देखभाल नहीं कर रहे। हंगामे की सूचना मिलते ही सिविल लाइन पुलिस अस्पताल में पहुंची और परिजनों को समझाकर शांत करवाया।
परिजनों ने आरोप लगाते हुए कहा कि उनके मरीज पिछले कई दिनों से आइसोलेशन वार्ड में दाखिल हैं। पहले तो उन्हें अपने मरीज के साथ रहने और देखभाल करने की अनुमति दे दी गई, लेकिन अब उन्हें वार्ड से बाहर निकाल दिया है। ऐसे हालात में मरीजों को सही इलाज व देखभाल नहीं मिल रही है। न तो वे खुद वार्ड में जाकर उनकी देखभाल व सेवा कर सकते हैं और न ही कोई नर्स या सहायक मरीजों को संभाल रहा है। गुस्साए परिजनों ने कहा कि अगर अस्पताल प्रबंधन सही ढंग से इलाज और देखभाल नहीं कर सकता है तो मरीजों को छुट्टी दे दे। वे अपने मरीजों की घर पर ही सेवा या देखभाल कर लेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वार्ड में दाखिल मरीज कोरोना के अलावा अन्य बीमारियों से भी पीड़ित हैं। उन्हें अन्य बीमारियों की दवाई तक नहीं दी जा रही है। ऐसे में वे कैसे मान लें कि उनके मरीज का इलाज सही होगा और वो जल्द ठीक हो जाएगा।
इस संबंध में अस्पताल की प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर डॉ. रेनू चावला ने कहा कि नियमों के अनुसार संक्रमित व्यक्ति के साथ अन्य व्यक्ति वार्ड में नहीं रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में डॉक्टर, सहायक व नर्सों द्वारा मरीज का पूरे सही तरीके से इलाज किया जा रहा है। संक्रमित व्यक्तियों को किसी प्रकार की दिक्कत न हो इसके लिए उन्होंने स्टाफ में पहले से ज्यादा बढ़ोतरी की है। आगे और ज्यादा स्टाफ मरीजों की देखभाल व इलाज के लिए लगाया जाएगा।