सीजन में गेहूं खरीद के भुगतान को लेकर जूझने के बाद आढ़ती अब आढ़त के भुगतान में खरीद एजेंसियों के कट से परेशान हैं। आढ़तियों को दी जाने वाली आढ़त में से खरीद एजेंसियां लस्टर लॉस और टुकड़े के नाम पर राशि काट रही हैं। आढ़तियों का कहना है कि यदि उनकी इस संबंध में मांग नहीं मानी गई तो वे कोर्ट का सहारा लेंगे। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह प्रदेश मुख्यालय स्तर पर लिया गया फैसला है। इस बारे में आला अधिकारी ही कुछ बता सकते हैं।
क्या है लस्टर लॉस : लस्टर लॉस गेहूं की चमक को कहा जाता है। जिसमें चमक कम होने पर इसकी कीमत पर असर पड़ता है। जिससे कीमत भी प्रभावित होती है। इसी प्रकार से यदि गेहूं की फसल में टुकड़ा है तो टुकड़े के नाम पर भी कट लगाया जाता है।
तीन महीने तक भुगतान नहीं -आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान कृष्ण मित्तल ने कहा कि गेहूं के सीजन को बीते तीन माह हो चुके हैं। लेकिन भुगतान नहीं किया गया है। अब जब भुगतान का पता चला है तो बताया जा रहा है कि आस-पास की मंडियों में भी लस्टर लॉस और टुकड़े के नाम पर कट लगाया जा रहा है। 4 रुपये 81 पैसे टुकड़े, 9 रुपये 62 पैसे का कट लगाया जा रहा है। डीएफएससी द्वारा 9.62 रुपये, हैफेड द्वारा शुरू में 24 रुपये, अब 14 रुपये 43 पैसे का कट लगाया जा रहा है। जब किसान अपनी फसल बेचकर पूरी कीमत लेकर जा चुका है तो अब आढ़तियों से तीन माह बाद ये किस बात के पैसे काटे जा रहे हैं। खरीद के समय क्यों नहीं बताया गया कि गेहूं की किस ढेरी में चमक कम है और कौन सी ठीक है। अब कौन सा पैमाना है कि आढ़तियों की सारी की सारी ढेरियों की चमक कम थी। चमक एकाध ढेरी की कम हो सकती है, लेकिन हर कट्टे के साथ कट लगाना कहीं से भी न्यायसंगत नहीं है।
अकेले कैथल मंडी में डेढ़ करोड़ का नुकसान : आढ़ती एसोसिएशन का कहना है कि अभी तक कैथल अनाज मंडी का कट के साथ भुगतान नहीं हुआ है। आस-पस की मंडियों से कट लगा कर भुगतान कर दिया गया है। यदि कैथल अनाज मंडी में भी इसी तरह कट लगता है तो अकेले कैथल की नई अनाज मंडी को डेढ़ करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा।
आढ़तियों सतनारायण शर्मा, पवन बंसल, ईश्वर जैन, अरुण गर्ग, सतीश रोहेड़ा, रामफल मित्तल, मुकेश सजूमा, बलकार अटैला, सतनारायण मित्तल, चंद्रभान सेगा, ज्ञान चंद, रमेश बंसल नरड़, मोहन गर्ग, रमेश कठवाड़, शीशपाल, रणदीप संधू, नरेश शेरगढ़ सहित अन्य ने कहा कि आढ़ती सीजन में भी कई निर्णय के कारण परेशान रहे। अब नए फरमान से उन्हें ओर परेशानी में डाल दिया है। एक आढ़त ही तो है, जिसके सहारे वे रोजगार चला रहे हैं। इसमें भी यदि इस तरह से कट लगेगा तो वे रोजी-रोटी कैसे चलाएंगे। स्टेट वेयर हाउस व एफसीआई ने तो अभी तक मजदूरी तक नहीं दी है।
इस संबंध में डीएफएससी प्रमोद कुमार का कहना है कि इस संबंध में अधिकारिक स्तर पर बातचीत चल रही है। सीजन के बाद इस तरह से कट लगाने के प्रश्र पर उन्होंने कहाकि यह कट उन्होंने तो लगाया नहीं, यह विभाग का फैसला है। विभाग के जो भी आदेश होंगे, उनकी पालना की जाएगी। डीएफएससी द्वारा 9 रुपये 62 पैसे के हिसाब से कट लगाया गया है।