राजिंद्र तंवर
कैथल। स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आगामी वर्ष 2026 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों से नौ खेलोें को बाहर कर दिया गया है। ऐसे में अब इन खेलों के खिलाड़ी इनमें भाग नहीं ले पाएंगे। राष्ट्रमंडल खेल महासंघ (सीजीएफ) के इस फैसले से कैथल के प्रशिक्षक व खिलाड़ी काफी निराश और नाखुश हैं।
उन्होंने इस फैसले को गलत बताते हुए कहा है कि इससे खेलों में नुकसान होगा। फैसले से राष्ट्रमंडल खेलों में पदक तालिका पर भी असर पड़ेगा। देश व प्रदेश के पहलवानों ने सबसे अधिक पदक कुश्ती में ही जीते हैं।
गौरतलब है कि राष्ट्रमंडल खेलों से कुश्ती, हॉकी व बैडमिंटन समेत नौ खेलों को बाहर कर दिया गया है। अबकी ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में केवल 10 स्पर्धाओं के मुकाबले कराए जाएंगे। इनमें एथलेटिक्स, तैराकी, नेटबॉल, ट्रैक साइकिलिंग, आर्टिस्टिक जिमनास्टिक्स, भारोत्तोलन, मुक्केबाजी, जूडो, बाउल्स और बास्केटबॉल ही शामिल हैं।
प्रशिक्षकों व पहलवानों ने इस फैसले को कुश्ती व अन्य खेलों के प्रति साजिश बताया है। भारत के पहलवान कुश्ती में सबसे ज्यादा पदक लेकर आते हैं। ऐसे में साजिश के तहत भारत को पदक तालिका में नीचे रखने के लिए खेलों को बाहर किया गया है। खिलाडि़यों ने कहा कि सरकार को राष्ट्रमंडल खेल महासंघ पर दबाव डालना चाहिए कि वह खेलों को दोबारा शामिल करें।
राष्ट्रमंडल खेलों में भारत अकेले कुश्ती में 49 स्वर्ण सहित 114 पदक पदक जीत चुका है। वर्ष 2022 के राष्ट्रमंडल खेलों में कुश्ती स्पर्धा में ही भारत ने छह स्वर्ण समेत 12 पदक जीते थे। अब वर्ष 2026 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में से नौ खेल बाहर करने की बात सुनकर खिलाडि़यों को झटका लगा है। खिलाड़ी मैदान पर सुबह शाम कड़ी मेहनत कर रहे हैं पर अबकी उनको खेलने का ही मौका नहीं मिलेगा। खेलों को बाहर करने का समाचार उनके सपनों को चकनाचूर करने वाला है। संवाद
अंतरराष्ट्रीय पैरा ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता तीरंदाज खिलाड़ी हरविंद्र सिंह ने कहा कि तीरंदाज खेल तो पहले से ही बाहर है। लगातार खेलों को घटाया जा रहा है। राष्ट्रमंडल खेलों में सभी खेलों को मौका दिया जाना चाहिए। खिलाड़ी मेहनत कर रहे हैं। सभी खिलाड़ी इसी उम्मीद में थे कि वे राष्ट्र मंडल खेलों में भाग लेंगे, परंतु अचानक इन खेलों को राष्ट्रमंडल खेलों से बहार करने का ये फैसला, खिलाडिय़ों के सपनों को चकनाचूर करने वाला है।
कुश्ती कोच सुरेंद्र धारीवाल ने बताया कि कुश्ती व कबड्डी से ही हरियाणा की पहचान है। कुश्ती प्राचीन खेल है ओर ये शुरू से खेला जा रहा है। राष्ट्रमंडल खेलों में से कुश्ती समेत नौ खेल बहार करने का ये फैसला खिलाडिय़ों के लिए नुकसानदायक है। ऐसे तो कुश्ती का खेल बिल्कुल खत्म हो जाएगा और खिलाडिय़ों को भविष्य खराब हो जाएगा। वहीं सरकार को ठोस कदम उठाना चाहिए और देश के खिलाड़ियों के लिए अपील करनी चाहिए।
क्रिकेट कोच रामभज शर्मा पिलनी ने कहा कि क्रिकेट को राष्ट्रमंडल खेलों से बाहर करने का ये फैसला कोच व खिलाड़ियों के लिए निराशाजनक विषय है क्योंकि कई वर्षों बाद क्रिकेट खेल को पिछले ही वर्ष राष्ट्रमंडल खेलों में शामिल किया गया था। केवल महिला खिलाड़ियों की टीम को ही इन खेलों में किया था ओर महिला खिलाड़ियों की टीम ने दो बार देश के लिए पदक जीते हैं। सरकार को इस पर विचार कर इस संबंध में प्रयास करना चाहिए।
क्रिकेटर ईशा शर्मा ने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों में आने बाद ही लड़कियों ने अभी क्रिकेट खेलना शुरू किया था। राष्ट्रमंडल खेलों से उम्मीद जगी थी कि यदि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलों तक नही पहुंच सके तो, एशियन को राष्ट्रमंडल में खेल कर अपना भविष्य तो बना सकते है। अब क्रिकेट को राष्ट्रमंडल खेलों से बाहर किए जाने को फैसला खिलाडिय़ों के लिए चिंताजनक है। वहीं सरकार को भी इसे फैसले पर संज्ञान लेना चाहिए।
हॉकी कोच सुरेंद्र प्रताप ने कहा कि वर्ष 2026 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में से हॉकी समेत नौ खेल बहार करने का ये फैसला खिलाड़ियों के लिए काफी दुख की बात है। उम्मीद हैं कि सरकार इस फैसले पर अपना पक्ष रखेगी ओर दोबारा प्रयास कर अपील करेगी। नहीं तो खेलोंं में मेहनत कर रहे खिलाड़ियों का भविष्य अंधकार में चला जाएगा। हॉकी खिलाड़ियाें को गिनी-चुनी प्रतियोगिताएं मिलती हैं। उनसे भी देश को बाहर किया जा रहा है। यह गलत है।
कैथल बैडमिंटन अकादमी के संचालक राजिंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 2026 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में से बैडमिंटन समेत नौ खेल बहार करने का ये फैसला बहुत गलत है। बैडमिंटन खिलाड़ी अपनी मेहनत से विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेकर देश के लिए पदक जीत रहें हैं। इस पर भारत सरकार के खेल मंत्री को संज्ञान लेना चाहिए और अपना मजबूत पक्ष रखना चाहिए। ऐसे फैसलों से खेलों में देश को नुकसान होगा।
राष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी वाकुल ने कहा कि वर्ष 2026 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में बदलाव का फैसला चिंताजनक है। हर खिलाड़ी का सपना होता है कि वे राष्ट्रमंडल खेलों में भाग पदक जीत ओर देश का नाम रोशन करें ओर इसके लिए वे कड़ी मेहनत कर रह हैं। खिलाडिय़ों के भविष्य को लेकर सरकार को ठोस कदम उठाना चाहिए और अपना
पक्ष मजबूत करना चाहिए, ताकि खिलाड़ियों का भविष्य अंधकार में
न जाएं।