संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। पंचायत विभाग ने चौशाला व मटौर गांव में अमृत सरोवर योजना के तहत कायाकल्प के नाम पर आधे-अधूरे पड़े तालाबों को मछली पालन के लिए पट्टे पर देने का एक फरमान जारी किया है। इसमें आयुर्वेद के जरिए विश्व को निरोग जीवन का फार्मूला देने वाले च्यवन ऋषि की तपोस्थली गांव चौशाला का ढोबी सरोवर शामिल है।
सुंदरीकरण के नाम पर बदहाल हुए इस सरोवर का मुद्दा पिछले कई माह सेे चर्चा में है। इस संबंध में ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री मनोहर लाल को शिकायत भेजते हुए सरोवर सुंदरीकरण योजना की सिरे से जांच करने की मांग की है। शिकायत में यह बताया है कि गांव चौशाला के ऐतिहासिक ढोबी, कतनार व चांद वाला तालाब के कायाकल्प के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होना दर्शाए जा रहे हैं। जबकि मौका स्थल पर जल भराव व निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। कायाकल्प के नाम पर भी धरातल पर परिणाम संतोष जनक नहीं है।
चौशाला गांव के साथ-साथ मटौर गांव का बाजीसर की बोली करवाने के आदेश जारी किए हैं। एक सप्ताह के समय अंतराल मेंं इस कवायद को पूरा करने के निर्देेश अधिकारियों को हैं। इसके अलावा खंड के विभिन्न गांवोंं में भी तालाबों की बदहाल स्थिति बड़ा मुद्दा बनी है। मुख्यमंत्री सुशासन की तरफ से सोमवार को टीम ने चौशाला गांव के तालाबों का मुआयना करने को दस्तक दी। इस दौरान पंचायती राज विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे। लेकिन मुआयने मेंं क्या निष्कर्ष टीम ने निकाला? इसका खुलासा नहीं किया गया है।
ग्राम सचिव सुनील कुमार ने कहा कि तालाबोंं को मछली पालन के लिए बोली पर देने के आदेश मिले हैं। शीर्ष अधिकारियों के आदेश अनुसार बोली के तिथि निर्धारित की जाएगी।