संवाद न्यूज़ एजेंसी
ढांड। खरीद एजेंसी की ओर से आढ़ती की आढ़त नही दिए जाने का मामला अनाज मंडी एसोसिएशन के दरबार में पहुंच जाने के बावजूद भी ज्यों का त्यों लटका हुआ है। इस पर आढ़तियों ने रोष जताया है।
इसके विरोध में सोमवार को मंडी प्रधान नरेश सहारण की अध्यक्षता में बैठक की। मंडी एसोसिएशन ने संबंधित खरीद एजेंसी के खिलाफ रोष जताते हुए आढ़तियों ने खरीद एजेंसी के अधिकारियों की इस घोर लापरवाही की कड़े शब्दों में निंदा की है। मंडी प्रधान नरेश ने बताया कि ढांड मंडी में ज्यादातर आढ़तियों की आढ़त उनके बैंक खातों में आ चुकी है, लेकिन जगन्ननाथ शीशपाल फर्म की बकाया आढ़त खाते में नहीं भेजी गई है।
इस संबंध में प्रधान का कहना है कि पीआर धान की खरीद को बंद हुए अढ़ाई महीने से ज्यादा हो चुके है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से उक्त फर्म की आढ़त का कुछ हिस्सा डाल कर बकाया राशि डालने की जहमत नहीं उठाई है। उन्होंने कहा कि इसके लिए संबंधित खरीद एजेंसी के कार्यालय में जाकर अधिकारियों को भी गुहार लगा चुके है और लिखित में दे चुके है।
आज तक उनकी समस्या का कोई समाधान नही हुआ है। संबंधित अधिकारी यह कह कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाल लेते है कि हमारे यहां से तो सभी कागज भेज दिए गए है। चंडीगढ़ से ही आपकी समस्या का समाधान होगा। आढ़ती का कहना है कि जब धान की खरीद ढांड कार्यालय के अधिकारियों द्वारा की गई है और खरीद के उपरांत बिल भी यही पर जमा करवाए गए है तो फिर आढ़त के लिए हम चंडीगढ़ क्यों जाएं। यह काम तो संबंधित खरीद एजेंसियों के अधिकारियों का बनता है।
आढ़ती ने जिला प्रशासन से मांग की है उसकी आढ़त शीघ्र उसके बैंक खाते में डलवाई जाए। मंडी प्रधान नरेश सहारण ने बताया कि मंडी एसोसिएशन द्वारा भी संबंधित खरीद एजेंसी के अधिकारियों को लिखित में अनुरोध कर चुके है। कई बार मोबाइल के माध्यम से भी बात कर चुके है। लेकिन अधिकारी उनकी समस्या का समाधान क्यों नही निकाल रहे है। यह सब हमारी समझ से परे होता जा रहा है। अधिकारी जानबूझ कर आढ़तियों को परेशान करने में लगे हुए है। संबंधित अधिकारी इस प्रकार से अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नही झाड़ सकते।
खरीद एजेंसी खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ढांड के इंस्पेक्टर नीरज का कहना है कि ढांड मंडी की आढ़ती फर्म मेसर्स जगन्नाथ शीशपाल की धान की बकाया आढ़त किस कारण से रुकी हुई है। उसके लिए मेरे पास अभी तक लिखित में सूचना नहीं आई है। संबंधित आढ़ती फर्म को चाहिए कि वह मेरे पास लिखित में जानकारी दे। उसके बाद उसकी जांच करवाई जाएगी कि किस कारण से बकाया आढ़त रुकी हुई है।