कैथल। युद्ध के मोर्चे पर अपनी जान की बाजी लगाकर देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिक जब सेवानिवृत्त होकर सामाजिक जीवन में लौटते हैं, तो उम्र बढ़ने के साथ उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
जिन मूलभूत सुविधाओं — जैसे आवास, चिकित्सा, शिक्षा और पुनर्वास — का वादा सरकार से किया गया था, वे आज तक उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। पेंशन में भी समय के साथ कोई सार्थक बढ़ोतरी नहीं हुई है।
पूर्व सैनिकों का कहना है कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे खर्च भी बढ़ते हैं, लेकिन पेंशन उसी स्तर पर बनी रहती है। सरकार को इस ओर गंभीरता से ध्यान देकर पेंशन में नियमित वृद्धि सुनिश्चित करनी चाहिए। संवादसरकार अधिक संवेदनशील बने
सरकार को पेंशन बढ़ोतरी के मामले में अधिक संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उम्र बढ़ने के साथ खासकर चिकित्सा पर खर्च बढ़ता है। वर्तमान में 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर पेंशन में 20 प्रतिशत वृद्धि होती है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। सरकार को चाहिए कि 60 वर्ष की आयु पर पेंशन में कम से कम 5 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि करे, ताकि चिकित्सा खर्च का बोझ कम हो सके।”
-रामेश्वर फौजी, पूर्व सैनिक, कैथल
20 कैथल। फौजी रामेश्वर। स्वयं