अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए सीमा पर दुश्मन से लड़ने वाले जांबाज पूर्व सैनिक का जज्बा आखिरकार हुडा विभाग की नीतियों के आगे दम तोड़ गया। मंगलवार को पूर्व सैनिक रामभगत वर्मा ने 54 लाख रुपये की एक्सटेंशन फीस का नोटिस देखकर मौत को गले लगाना मुनासिब समझा। परिजनों ने मौत का जो कारण बताया है, वह चौंकाने वाला है। किसी जमाने में 7000 रुपये में लिए प्लॉट पर हुडा ने 54 लाख रुपये के जुर्माने का नोटिस भेज दिया।
मृतक के बेटों ने बताया कि उनके पतिा ने वर्ष 1971 की लड़ाई में भाग लिया था। उन्होंने सीमा पर देश के दुश्मनों के दांत खट्टे किए थे। रिटायर होने के बाद उन्होंने मंडी टाउनशिप द्वारा करवाई गई बोली में मॉडल टाउन में 7000 रुपये में 200 गज का प्लॉट लिया था जिसके कागजात पूरे करने में उनके प्राण ही चले गए।
रामभगत के बेटे रामचंद्र वर्मा ने बताया कि वर्ष 1970 में बोली में 7000 रुपये में मॉडल टाउन में प्लॉट खरीदा था जिसकी रजिस्ट्री के लिए वे भटकते रहे लेकिन विभाग ने रजिस्ट्री ही नहीं करवाई। इस मामले में उनका सुप्रीम कोर्ट में भी केस चल रहा है। विभाग ने जो भी कागजात मांगे, वे दिए लेकिन अधिकारियों व कर्मचारियों ने उनकी कोई बात नहीं सुनी।
वे खुद भी अपने पिता के साथ कई बार विभाग के कार्यालय में गए लेकिन कर्मचारी कभी कल तो कभी अगले सप्ताह आने की बात कहकर उन्हें टालते रहे। अब 31 दिसंबर को आए 54 लाख रुपये के नोटिस ने तो सभी को हिला कर रख दिया। वे इस बारे में मंगलवार सुबह भी अधिकारियों से मिलने गए थे लेकिन वहां कोई सुनवाई न होने पर उनके पिता को यह कदम उठाना पड़ा।
पहले यह प्लॉट मंडी टाउनशिप के तहत आता था लेकिन पिछले कई साल से इसे हुडा विभाग को दे दिया गया। जिस कारण अब हुडा द्वारा नोटिस जारी किया गया है।
विभाग की नीति के कारण बनी इतनी जुर्माने की राशि
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार हुडा की नीति के अनुसार एक्सटेंशन फीस हर साल दोगुनी हो जाती है। यदि यह पिछले साल 100 रुपये थी तो जमा न करवाए जाने पर अगले साल यह 200 रुपये हो जाएगी। इस तरह से रामभगत वर्मा के घर पर भी इसी नीति के तहत हर साल एक्सटेंशन फीस दोगुनी होती गई और 7000 रुपये कीमत के प्लॉट पर एक्सटेंशन फीस बढ़कर 54 लाख रुपये तक जा पहुंची। इसमें भी एक्सटेंशन फीस 43 लाख 46 हजार रुपये, एक्सटेंशन फीस सरचार्ज 4 लाख 25 हजार एवं सर्विस टैक्स 6 लाख 30 हजार रुपये जा पहुंचा।