संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग और जल व स्वच्छता सहायक संगठन की ओर से गुहला बीडीपीओ सभागार में एक दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का आयोजन करवाया गया।
इसमें मुख्य वक्ता जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग वासो के जिला सलाहकार दीपक कुमार ने कहा कि जल पर्यावरण का जीवनदायी तत्व है। यह पारिस्थितिकी के निर्माण में आधारभूत कारक है। वनस्पति औरषजीव-जंतु इसी से पोषक तत्वों की प्राप्ति करते हैं।
कार्यशाला में गुहला खंड के 22 गांवों के सरपंचों, पंचों, ग्राम सचिवों व स्वयं सहायता समूह ने भाग लिया। इस मौके पर दीपक कुमार ने बताया कि पिछले कुछ सालों के दौरान पेड़ों की अंधाधुंध कटाई अंधाधुंध के कारण बारिश का पानी मिट्टी की ऊपरी परत को काटते हुए बह जाता है। इसके विपरीत नलकूप, कुओं आदि से भूमिगत जल का खींचना बेतरतीब बढ़ा है।
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग कैथल के रसायनज्ञ सुभाष चंद ने पानी की जांच के लिए फील्ड टेस्टिंग किट (एफटीके) के बारे में विस्तार से जानकारी दी। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की अटल भूजल योजना से आईईसी एक्सपर्ट विक्रम सिंह अटल भूजल योजना के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी।
बीआरसी रघबीर सिंह ने ग्राम जल एवं स्वच्छता कमेटी के कर्तव्यों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। प्रोजेक्टर पर पानी बचाने की छोटी-छोटी वीडियो दिखाकर जल संरक्षण का संदेश दिया गया। इस मौके पर कनिष्ठ अभियंता सौरभ गर्ग मौजूद रहे। अब गुहला खंड में ही पांच मार्च को 22 सरपंचों, 88 पंचों, 18 ग्राम सचिवों व 22 स्वयं सहायता समूह को प्रशिक्षण दिया जाएगा।