फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

धैर्य रखकर बड़े से बड़े संकट को टाला जा सकता है : रक्षा सरस्वती

विज्ञापन
मुख्यातिथि निशान सिंह को सम्मानित करते हुए कथा वाचक रक्षा सरस्वती। - फोटो : 1
विज्ञापन
गुहला-चीका। भवानी मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। इसके तीसरे दिन कथावाचक रक्षा सरस्वती ने सती चरित्र का प्रसंग सुनाया। समाजसेवी निशान शर्मा ने सपरिवार मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की और कथा का शुभारंभ किया।
विज्ञापन

कथावाचक ने बताया कि भगवान शिव की बात को न मानकर सती अपने पिता के घर चली गई, जहां उन्हें अपमानित होना पड़ा और अंत में स्वयं को अग्नि में स्वाह करने को मजबूर हुईं।

उन्होंने ध्रुव का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि ध्रुव की सौतेली मां सुरुचि की ओर से अपमानित होने पर भी उसकी मां सुनीति ने धैर्य नहीं खोया जिससे एक बहुत बड़ा संकट टल गया। इससे साबित होता है धैर्य व संयम से बड़े से बड़े संकट को टाला जा सकता है।
विज्ञापन


उन्होंने बताया कि भक्त ध्रुव ने बाल्य काल में ही कड़ी तपस्या कर श्रीहरि को प्रसन्न किया था, इससे पता चलता है कि भक्ति के लिए उम्र कभी बाधा नहीं होती है।

प्रह्लाद का वृत्तांत सुनाते हुए रक्षा सरस्वती ने बताया कि अपने भक्त की रक्षा के लिए भगवान नरसिंह लोहे के खंभे को फाड़कर प्रकट हो गए थे और हिरण्याकश्यप का वध कर प्रह्लाद के प्राणों की रक्षा की थी। कलयुग में श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से व्यक्ति के जन्मों जन्मों के पाप कट जाते हैं।

कथा में प्रधान बलबीर सैनी, राजीव शर्मा, कुलदीप माजरा, मुख्य्यजमान निर्मल शर्मा व धर्मपाल आदि मौजूद रहे।

मुख्यातिथि निशान सिंह को सम्मानित करते हुए कथा वाचक रक्षा सरस्वती।- फोटो : 1

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें