संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। शहर के सेक्टर 25 में स्थापित ट्रांसपोर्ट नगर में सफाई और मूलभूत सुविधाओं की घोर अनदेखी से व्यापारी वर्ग में भारी रोष है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) ने इस मार्केट की सफाई का ठेका दिया है, लेकिन ठेकेदार की लापरवाही के कारण नियमित सफाई नहीं हो रही।
बारिश के मौसम में नालों की सफाई भी अब तक नहीं करवाई गई है, जिससे जलभराव और गंदगी की स्थिति बनी हुई है। लाखों रुपये खर्च कर जमीन खरीदने वाले व्यापारियों को बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हो रही हैं।
बदहाल पार्क बना खतरे का केंद्र ः मार्केट में पार्क के लिए छोड़ी गई जगह भी झाड़ियों से अटी पड़ी है, जहां सांप व अन्य जहरीले कीटों के पनपने की आशंका बनी रहती है। दुकानदारों का कहना है कि पार्क को विकसित कर साफ-सुथरा और सुरक्षित स्थान बनाया जाना चाहिए ताकि व्यापारियों और ग्राहकों को कुछ राहत मिल सके।
नालों की सफाई में दोहरा मापदंड ः व्यापारियों का कहना है कि जहां शहर के अन्य इलाकों में नालों की सफाई करवा दी गई, वहीं ट्रांसपोर्ट नगर के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। डीसी के स्पष्ट आदेशों के बावजूद यहां की अनदेखी की जा रही है।
व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि सफाई, लाइट और अन्य बुनियादी सुविधाएं तत्काल प्रभाव से उपलब्ध करवाई जाएं, ताकि ट्रांसपोर्ट नगर वास्तव में एक व्यवस्थित व्यापारिक केंद्र बन सके, न कि उपेक्षा का शिकार इलाका। काम कराने से मिल सकती है राहत।
स्ट्रीट लाइट की कमी से बढ़ती असुरक्षा
ट्रांसपोर्ट नगर में स्ट्रीट लाइटों की भी स्थिति दयनीय है। मुख्य सड़कों पर तो कुछ लाइटें हैं, लेकिन अंदरूनी गलियों और बाजार के बीच के रास्तों पर अंधेरा पसरा रहता है। कुछ जगहों पर लगी लाइटें भी खराब पड़ी हैं, जिससे शाम के समय व्यापारियों और ग्राहकों को असुविधा का सामना करना पड़ता है।
पार्क की हालत बेहद खराब है। यहां सिर्फ झाड़ियां उगी हैं। विभाग को इसे साफ कराकर सुंदर पार्क बनवाना चाहिए। - नरेश शर्मा, दुकानदार
बीच के रास्तों पर लाइटें नहीं हैं। इससे रात में आवाजाही में दिक्कत होती है। प्रशासन को जल्द समाधान करना चाहिए। -नीरज बंसल, दुकानदार
ठेकेदार को अलग से सफाई का ठेका दिया गया है, फिर भी काम नहीं हो रहा। यह सरासर लापरवाही है। -समीर नागपाल, दुकानदार
गलत प्रॉपर्टी आईडी से भी हो रही परेशानी
व्यापारियों ने बताया कि प्रॉपर्टी आईडी गलत होने से भी परेशानी झेल रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिन दुकानदारों ने अपनी दुकानें बना ली हैं, उनकी प्रॉपर्टी आईडी तक गलत बना दी गई है। व्यापारी नगर परिषद कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन नतीजा सिफर ही है। समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा। दुकानें बने चार साल बीत चुके हैं, लेकिन यहां पर मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं मिल सकी हैं।