संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। नगर पालिका में निजी क्षेत्र की पुश्तैनी व खरीदी गई करोड़ों की जमीनी संपत्ति को प्रॉपर्टी आईडी की आड़ में खुर्दबुर्द करने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। हरियाणा में संभवतः यह पहला ऐसा प्रकरण है, जिसमें लंबी-चौड़ी प्रक्रियाओं से गुजरकर पहले जमीन का वास्तविक मालिकाना हक स्थापित किया गया, और बाद में फर्जी बताते हुए उसकी आईडी पोर्टल से डिलीट कर दी गई।
मामले के अनुसार, जमीन मालिकों ने अपना अधिकार सिद्ध करते हुए विकास शुल्क जमा करवा कर अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) भी प्राप्त कर लिए थे, लेकिन अब यह महत्वपूर्ण दस्तावेज महज कागज के टुकड़े बनकर रह गए हैं। कई मामलों में बेशकीमती जमीन को गुपचुप तरीके से नगर पालिका के पोर्टल से गायब किया गया।
जमीन की हेराफेरी का यह मामला सीएम विंडो के माध्यम से सरकार के संज्ञान में पहुंचा है। इस संबंध में कलायत निवासी वीरेंद्र सिंह ने सीएम विंडो, शहरी स्थानीय निकाय निदेशक, जिला नगर आयुक्त समेत अन्य स्तरों पर शिकायत दर्ज कराते हुए दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता वीरेंद्र सिंह ने बताया कि नगरपालिका द्वारा उनकी सजूमा रोड स्थित लगभग एक हजार गज जमीन की प्रॉपर्टी आईडी से सुनियोजित तरीके से छेड़छाड़ कर उसे रद्द कर दिया गया। यह प्रॉपर्टी आईडी उन्होंने वर्ष 2022 में सभी प्रक्रियाएं पूरी कराकर बनवाई थी। यह उनकी पुश्तैनी जमीन है।
उनका कहना है कि उनकी भूमि का रकबा मौजा कलायत अंदर, हदूद नगरपालिका, खेवट नंबर 224, 225, 226, जमाबंदी वर्ष 2020–21 में दर्ज है, जो स्वयं उनकी और उनके परिवार की जायदाद है। इसमें रवींद्र के नाम 171, रघुविंद्र के 327, विधवा प्रकाशो के 31 तथा धीरेंद्र के नाम 403 वर्ग गज जमीन शामिल है। सारी प्रॉपर्टी विधिवत अधिकृत थी। बावजूद इसके वह अफसरों की कारगुजारी से परेशान हो रहे हैं।
आरोप ः जमीनी रिपोर्ट को भी पालिका अधिकारियों ने किया नजरअंदाज
वीरेंद्र सिंह ने आरोप लगाते हुए बताया कि विभागीय नियमानुसार भूमि की तस्दीक हल्का पटवारी और तहसीलदार से करवाई गई थी। भूमि का नक्शा भी संलग्न किया गया। इसके अलावा सभी शुल्क जमा करवाकर नो ड्यूज प्रमाण पत्र भी लिया गया। इसके बावजूद प्रॉपर्टी आईडी डिलीट कर दी गई। जब हाल ही में इस बात का खुलासा हुआ, तो नगरपालिका अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन कोई समाधान नहीं किया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से न्याय की गुहार लगाते हुए सीएम विंडो पर शिकायत दर्ज की गई। फिलहाल जांच कार्यवाही प्रारंभ हो चुकी है।
पहले भी हुईं हैं शिकायतें ः कलायत नगर पालिका क्षेत्र में प्रॉपर्टी आईडी बनाने और फिर अचानक डिलीट करने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी पूर्व चेयरपर्सन प्रतिनिधि सलिंद्र प्रताप राणा समेत अन्य कई लोग अपनी खरीदी गई जमीन की आईडी डिलीट होने की शिकायतें करते रहे हैं। उनका कहना है कि असली मालिकों की जगह दूसरों को जमीन का मालिक बनाया जा रहा है। कुछ मामलों में खेवट रिकॉर्ड और मौके की स्थिति मेल नहीं खा रही। इन मामलों में भी करोड़ों रुपये की संपत्ति शामिल है।
सीएम विंडो पर दर्ज शिकायत के आधार पर दस्तावेजों की छानबीन की जा रही है। नियमानुसार शिकायत का निस्तारण कर रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। -पवन कुमार, सचिव-नगर पालिका, कलायत।